
नई दिल्ली। भारत में क्रिसमस सेलिब्रेशन के दौरान कई राज्यों से तोड़फोड़ और कथित हमलों की खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं को लेकर न सिर्फ़ देश के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी व्यापक कवरेज देखने को मिली है।

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, उत्तर प्रदेश और ओडिशा समेत कई राज्यों से ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट आई है, जिनमें क्रिसमस मना रहे लोगों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार और हिंसा की बात कही गई है। मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इन घटनाओं पर चिंता जताते हुए ईसाई समुदाय की सुरक्षा की मांग की है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कुछ स्थानों पर हिंदू दक्षिणपंथी संगठनों पर क्रिसमस समारोहों में बाधा डालने के आरोप लगे हैं। अरब टाइम्स (कुवैत) ने एक वीडियो का ज़िक्र किया है, जिसमें कुछ लोगों को क्रिसमस मना रही महिलाओं से टोपी उतारने और घर जाने को कहते हुए दिखाया गया है। हालांकि, किसी भी मीडिया हाउस ने इस वीडियो की पुष्टि नहीं की है।
अरब टाइम्स के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं के पीछे ‘दक्षिणपंथी राष्ट्रवाद के बढ़ते प्रभाव’ की भूमिका हो सकती है। रिपोर्ट में ओडिशा और मध्य प्रदेश की घटनाओं का भी उल्लेख है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक मॉल में तोड़फोड़ की घटना सामने आई, जहाँ कथित तौर पर लोगों से उनकी धार्मिक पहचान पूछी गई। मॉल प्रबंधन के अनुसार, इस घटना में लाखों रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, मध्य प्रदेश के जबलपुर में भी प्रार्थना सभाओं के दौरान हंगामे की खबरें आई हैं।
ब्रिटेन के अख़बार द इंडिपेंडेंट ने लिखा है कि हिंदू राइट-विंग समूहों द्वारा क्रिसमस समारोहों में बाधा डाली गई, जिस पर ईसाई संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने चिंता जताई है। वहीं, टीआरटी वर्ल्ड ने इसे “डर के साये में मनाया गया क्रिसमस” बताया है।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्रिसमस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और दिल्ली स्थित कैथेड्रल चर्च में प्रार्थना सभा में शामिल हुए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि क्रिसमस प्रेम, शांति और करुणा का संदेश देता है और समाज में भाईचारे को बढ़ावा देता है।
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