
नई दिल्ली। साल 2025 देश के लिए उपलब्धियों के साथ-साथ गहरे जख्म भी छोड़ गया। आस्था, उत्सव और रोज़मर्रा की ज़िंदगी के बीच हुए हादसों ने सैकड़ों परिवारों को अपूरणीय नुकसान पहुँचाया। कहीं भीड़ बेकाबू हुई, कहीं आग ने तबाही मचाई, तो कहीं तकनीकी चूक और लापरवाही मौत का कारण बनी। प्रयागराज महाकुंभ से लेकर गोवा के नाइट क्लब तक, पूरे वर्ष देश ने कई दर्दनाक हादसों का सामना किया।

दिसंबर माह में भी त्रासदियों का सिलसिला थमा नहीं। बीते दो हफ्तों में अलग-अलग राज्यों में हुए तीन बस हादसों में कई लोगों की जान चली गई। तमिलनाडु के कडलूर में हुए सड़क हादसे में 9 लोगों की मौत हुई। कर्नाटक के चित्रदुर्ग में टक्कर के बाद स्लीपर बस में आग लगने से 7 यात्रियों की जान चली गई। वहीं उत्तर प्रदेश के मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर कई वाहनों की टक्कर के बाद लगी आग में 18 लोगों की मौत हो गई।
6 दिसंबर को गोवा के एक नाइट क्लब में भीषण अग्निकांड हुआ, जिसमें कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई और छह अन्य घायल हुए। इससे पहले 27 सितंबर को तमिलनाडु के करूर जिले के वेलुचमिपुरम में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की जान चली गई और 60 से अधिक घायल हुए।
जून का महीना विशेष रूप से भयावह रहा। तेलंगाना के पाशमेलारम में स्थित एक फार्मास्यूटिकल इकाई में हुए विस्फोट में 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई। इसी महीने 12 जून को अहमदाबाद में एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें कुल 260 लोगों की जान जाने की जानकारी सामने आई। हादसे में विमान में सवार यात्रियों के साथ-साथ जमीन पर मौजूद लोग भी इसकी चपेट में आए।
9 जून को मुंबई में लोकल ट्रेनों की भीड़ जानलेवा साबित हुई। मुंब्रा के पास अत्यधिक भीड़ के कारण कई यात्री ट्रेन से गिर गए, जिससे कम से कम चार लोगों की मौत हो गई। वहीं 4 जून को बेंगलुरु में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की आईपीएल जीत के जश्न के दौरान चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर मची भगदड़ में 11 लोगों की जान चली गई।
मई की शुरुआत में गोवा के शिरगांव गांव में श्री लैराई देवी मंदिर की वार्षिक जात्रा के दौरान भगदड़ मचने से पांच से अधिक लोगों की मौत हो गई। इससे पहले 15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर प्रयागराज जाने वाली ट्रेनों को लेकर फैली अफवाह के बाद भगदड़ मच गई, जिसमें कम से कम 18 लोगों की जान चली गई।
वर्ष की शुरुआत में ही 29 जनवरी को प्रयागराज महाकुंभ के दौरान मौनी अमावस्या के दिन भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। संगम तट पर बैरिकेड टूटने से 37 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जिनमें 30 महिलाएं और 7 पुरुष शामिल थे।
इन तमाम घटनाओं ने एक बार फिर भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और आपदा नियंत्रण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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