
उदयपुर। क्या आम इंसान की जान इतनी सस्ती है कि विकास कार्यों के दौरान सुरक्षा के बुनियादी मानकों को भी ताक पर रख दिया जाए? वल्लभनगर-भटेवर मार्ग पर शुक्रवार शाम हुई घटना ने एक बार फिर विकास की चमक के पीछे छिपी व्यवस्था की बदहाली को उजागर कर दिया है। रणछोड़पुरा के पास मिट्टी खाली कर रहे एक डंपर की लापरवाही ने 65 वर्षीय भगा रावत की जिंदगी छीन ली।
खालातोड़ निवासी भगा रावत शुक्रवार को वल्लभनगर अस्पताल में इलाज कराने और गेहूं पिसवाने आए थे। उन्हें क्या पता था कि उनकी साइकिल पर लदा आटे का वह थैला कभी उनके घर के चूल्हे तक नहीं पहुँच पाएगा। शाम साढ़े पांच बजे, जब वे अपनी साइकिल पर सवार होकर घर लौट रहे थे, तभी हाईवे निर्माण में लगे एक डंपर में बिजली का तार फंस गया। तार खिंचने से बिजली का भारी-भरकम पोल सीधे बुजुर्ग के सिर पर जा गिरा।
विकास या मौत का जाल?
इस हादसे ने निर्माण एजेंसी और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं:
सुरक्षा पर्यवेक्षण का अभाव : हाईवे निर्माण जैसी बड़ी परियोजना में मिट्टी डालने वाले भारी वाहनों के मूवमेंट के दौरान क्या वहां कोई ‘सेफ्टी ऑफिसर’ मौजूद था?
लटकते तारों का जोखिम : बिजली की लाइनें इतनी नीची क्यों थीं कि वे डंपर में फंस गईं? क्या बिजली विभाग और निर्माण एजेंसी के बीच कोई तालमेल नहीं है?
मानवीय जीवन की कीमत : एक बुजुर्ग अपने सिर पर पोल गिरने के बाद तड़पता रहा। ग्रामीणों की सक्रियता से बिजली बंद हुई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक सिस्टम की सुस्ती ने एक जान ले ली थी।
“सड़कें चौड़ी हो रही हैं, हाईवे चमक रहे हैं, लेकिन क्या इन चमकती सड़कों पर चलते आम आदमी की सुरक्षा की कोई गारंटी है?”
अस्पताल में पसरा सन्नाटा : वल्लभनगर सैटेलाइट अस्पताल में जब डॉक्टरों ने भगा रावत को मृत घोषित किया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। उनके परिवार को क्या जवाब दिया जाएगा? क्या मुआवजा उस कमी को पूरा कर पाएगा जो इस लापरवाही ने पैदा की है? पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन सवाल वही है कि क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किसी बड़े अधिकारी या ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई होगी?
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