
नई दिल्ली। ग्रिगोरी रासपुतिन—एक ऐसा नाम, जो एक सदी बाद भी इतिहास के सबसे रहस्यमयी और विवादित पात्रों में गिना जाता है। रूस का यह तथाकथित साधु अपनी तांत्रिक शक्तियों, भविष्यवाणियों और शाही परिवार पर प्रभाव के कारण पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना रहा। कहा जाता है कि मरने से पहले उसने भविष्यवाणी की थी कि उसकी मौत के साथ ही रूसी राजशाही का अंत भी तय हो जाएगा—और ऐसा ही हुआ।
30 दिसंबर 1916 को रूस की राजधानी पेट्रोग्राड (वर्तमान सेंट पीटर्सबर्ग) में ग्रिगोरी येफिमोविच रासपुतिन की हत्या कर दी गई थी। वह एक रहस्यमयी साधु, आध्यात्मिक व्यक्ति और स्वयंभू संत के रूप में जाना जाता था। उसका प्रभाव रूसी सम्राट जार निकोलस द्वितीय और खास तौर पर महारानी एलेक्जेंड्रा फ्योदोरवोना पर बेहद गहरा था।
राजपरिवार पर असाधारण प्रभाव
इतिहासकारों के अनुसार, जार निकोलस द्वितीय के पुत्र अलेक्सी हीमोफीलिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। माना जाता था कि रासपुतिन की प्रार्थनाओं और उपचार पद्धतियों से उनकी हालत में सुधार होता था। इसी कारण महारानी एलेक्जेंड्रा उसे ईश्वर का दूत मानने लगी थीं।
प्रसिद्ध इतिहासकार ऑरलैंडो फाइजेस अपनी पुस्तक “A People’s Tragedy: The Russian Revolution 1891–1924” में लिखते हैं कि रासपुतिन की मौजूदगी ने रूसी राजशाही की साख को भीतर से कमजोर कर दिया। उसका बढ़ता प्रभाव राजपरिवार, सेना और चर्च—तीनों के लिए असहज होता जा रहा था।
सत्ता के पतन का प्रतीक बना रासपुतिन
अमेरिकी इतिहासकार डगलस स्मिथ के अनुसार, प्रथम विश्व युद्ध के दौरान रूस की सैन्य असफलताएं, आर्थिक संकट और जनता में बढ़ता असंतोष रासपुतिन के नाम से जोड़ दिया गया। लोगों को लगने लगा कि वही सत्ता को अंदर से खोखला कर रहा है।
हत्या की साजिश और अंत
30 दिसंबर 1916 की रात राजकुमार फेलिक्स युसुपोव, ग्रैंड ड्यूक दिमित्री पावलोविच और कुछ अन्य कुलीनों ने मिलकर रासपुतिन की हत्या की साजिश रची। ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, पहले उसे ज़हर दिया गया, फिर गोली मारी गई और अंत में उसका शव नेवा नदी में फेंक दिया गया। हालांकि उसकी मौत के तरीकों को लेकर आज भी मतभेद हैं।
इतिहासकार मानते हैं कि यह हत्या राजशाही को बचाने के इरादे से की गई थी, लेकिन परिणाम इसके बिल्कुल उलट निकले। कैम्ब्रिज हिस्ट्री ऑफ रशिया के अनुसार, यह घटना उस सड़ी-गली व्यवस्था का प्रतीक थी, जो कुछ ही महीनों बाद 1917 की रूसी क्रांति में पूरी तरह ढह गई।
भविष्यवाणी जो सच साबित हुई
रासपुतिन ने अपनी मृत्यु से पहले जार निकोलस द्वितीय को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि यदि उसकी हत्या राजघराने से जुड़े लोगों द्वारा की गई, तो राजशाही का अंत निश्चित है। इतिहास गवाह है कि 1917 में रूसी क्रांति हुई और रोमानोव वंश का शासन हमेशा के लिए समाप्त हो गया।
लोकसंस्कृति में भी जीवित है रासपुतिन
रासपुतिन की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। वर्ष 1978 में जर्मन-कैरेबियन पॉप ग्रुप Boney M ने “Rasputin” नामक गीत रिलीज़ किया, जिसने दुनिया भर में लोकप्रियता हासिल की। इस गीत में उसे “Russia’s greatest love machine” कहा गया, जिससे उसकी रहस्यमयी छवि और गहरी हो गई।
इतिहास में रासपुतिन आज भी सत्ता, अंधविश्वास और राजनीतिक पतन के खतरनाक मेल की चेतावनी के रूप में याद किया जाता है।
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