LIC के निजीकरण और स्टेक बिक्री के खिलाफ कर्मचारियों का हल्लाबोल, उदयपुर में जोरदार प्रदर्शन कर कलेक्ट्रेट पर दिया ज्ञापन

उदयपुर | अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ (AIIEA) और उत्तर क्षेत्रीय बीमा कर्मचारी संघ (NZIEA) के तत्वाधान में आज भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के कर्मचारियों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल के आह्वान पर कार्य बहिष्कार कर अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया। उदयपुर में मंडल सचिव अनूप जैन और मंडल अध्यक्ष महेश बदलानी के नेतृत्व में कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोला।

प्रमुख मांगें और विरोध के स्वर : हड़ताल के दौरान कर्मचारी संगठनों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर सरकार को घेरा। निजीकरण और स्टेक बिक्री पर रोक: केंद्र सरकार द्वारा LIC के प्रस्तावित 6 प्रतिशत स्टेक (हिस्सेदारी) को बेचने के फैसले का पुरजोर विरोध किया गया। कर्मचारियों ने इसे निजीकरण की दिशा में एक कदम बताते हुए संस्थान के अस्तित्व के लिए खतरा बताया।

असिस्टेंट की नई भर्ती : क्लास-3 श्रेणी में असिस्टेंट पदों पर रुकी हुई नई भर्तियों को शीघ्र शुरू करने की मांग की गई ताकि कार्यभार को कम किया जा सके।

लेबर कोड्स का विरोध : नए लेबर कोड्स के तहत काम के घंटों में संभावित वृद्धि को कर्मचारी विरोधी बताते हुए उन्हें तत्काल वापस लेने की मांग उठी।

पुरानी पेंशन (OPS) की बहाली : सभी कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की पुरजोर पैरवी की गई।

उदयपुर में शक्ति प्रदर्शन : देहलीगेट से कलेक्ट्रेट तक रैली

मंडल सचिव अनूप जैन ने बताया कि उदयपुर मंडल की सभी शाखाओं पर हड़ताल पूर्णतः सफल रही। उदयपुर शहर के सभी साथी देहलीगेट पर एकत्रित हुए, जहाँ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया गया। इसके पश्चात एक विशाल रैली निकाली गई जो कलेक्ट्रेट पहुँची, जहाँ जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपा गया।

प्रमुख वक्ताओं ने भरी हुंकार

प्रदर्शन के दौरान मंडल अध्यक्ष महेश बदलानी, हेमंत सिसोदिया, दिनेश भारती, देवेंद्र सिंह सुववत, सत्यनारायण शर्मा और वरुण मेहता ने संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि एलआईसी और बैंकों का निजीकरण न केवल कर्मचारियों बल्कि आम जनता की जमा पूंजी के साथ भी खिलवाड़ है।

महिला शक्ति की भी रही बड़ी भागीदारी

हड़ताल की खास बात यह रही कि इसमें मंडलीय समिति के सभी सदस्यों के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिला कर्मचारियों ने भी सक्रिय रूप से भाग लेकर अपनी आवाज बुलंद की। कर्मचारियों ने संकल्प लिया कि यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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