
नई दिल्ली/मुंबई। करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी के आरोपों का सामना कर रहे मशहूर फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेताम्बरी भट्ट को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान देश की शीर्ष अदालत ने दंपत्ति को कुछ कड़े प्रतिबंधों के साथ अंतरिम जमानत दे दी है। इससे पहले उदयपुर सेशन कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश और शर्तें
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने दंपत्ति को जमानत देते हुए निम्नलिखित शर्तें लागू की हैं:
पासपोर्ट सरेंडर : विक्रम और श्वेताम्बरी को अपने पासपोर्ट पुलिस के पास जमा करने होंगे।
दिल्ली में निवास : जांच चलने तक दोनों को दिल्ली में ही रहना होगा।
जांच में सहयोग : पुलिस और जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करना अनिवार्य होगा।
रकम की वापसी : कोर्ट ने जल्द से जल्द धोखाधड़ी की राशि वापस करने का निर्देश दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला उदयपुर स्थित इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के संस्थापक डॉ. अजय मुर्डिया से जुड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार डॉ. मुर्डिया अपनी पत्नी की बायोपिक बनवाना चाहते थे, जिसके लिए उनकी मुलाकात विक्रम भट्ट से हुई।
दोनों के बीच 4 फिल्मों के निर्माण का करार हुआ, जिसमें डॉ. मुर्डिया ने 44.29 करोड़ रुपये का निवेश किया।
आरोप है कि कुछ फिल्मों की शूटिंग के बाद काम रोक दिया गया और निवेश की गई राशि लौटाने के वादे से भट्ट दंपत्ति मुकर गए।
जब पैसे वापस मांगने पर टालमटोल की गई, तो संस्थापक ने कानूनी रास्ता अपनाया।
बढ़ती मुश्किलें : 13.5 करोड़ का एक और मामला
विक्रम भट्ट की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होती हैं। उन पर 13.5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का एक और मामला चल रहा है। इस मामले में 24 जनवरी को एक बिजनेसमैन ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसकी जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई आगामी गुरुवार को करेगा। तब तक भट्ट दंपत्ति को राहत के साथ-साथ जांच के दायरे में रहना होगा।
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