नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पीठ दर्द एक आम समस्या बन गया है, जिससे हर उम्र के लोग प्रभावित हो रहे हैं। लंबे समय तक बैठे रहना, खराब पोस्चर और तनाव इसके मुख्य कारण हैं। अक्सर पेनकिलर से भी स्थायी राहत नहीं मिलती। ऐसे में, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने कुछ सदियों पुराने आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खों को अपनाने की सलाह दी है, जो न केवल सुरक्षित और प्रभावी हैं, बल्कि दर्द और सूजन को कम करने में भी सहायक हैं।
लहसुन का तेल: दर्द और सूजन का अचूक इलाज आयुर्वेद में लहसुन को दर्द निवारक माना गया है। इसमें मौजूद एलिसिन और सल्फर कंपाउंड्स में शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।
उपयोग का तरीका:
8-10 लहसुन की कलियों को छील लें।
इन्हें नारियल या सरसों के तेल में धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक ये काली न पड़ जाएं।
तेल को छानकर ठंडा कर लें।
रात को सोने से पहले इस गुनगुने तेल से पीठ और कमर की 10-15 मिनट तक हल्की मालिश करें।
मालिश के बाद गर्म पानी से सेंक करने से रक्त संचार बढ़ता है और मांसपेशियों को आराम मिलता है, जिससे तुरंत राहत मिलती है।
हल्दी दूध: प्राकृतिक पेनकिलर और इम्युनिटी बूस्टर हल्दी अपने औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है, जिसमें कर्क्यूमिन नामक तत्व सूजन और दर्द को कम करने में बेहद प्रभावी है।
उपयोग का तरीका:
एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर मिलाएं।
कर्क्यूमिन के बेहतर अवशोषण के लिए चुटकी भर काली मिर्च और स्वाद के लिए थोड़ा गुड़ या शहद मिला सकते हैं।
रात को सोने से पहले इसका सेवन करें। यह प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में काम करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और शरीर की रिकवरी तेज करता है। एसिडिटी की समस्या होने पर इसकी मात्रा कम रखें।
ये आयुर्वेदिक नुस्खे बिना किसी साइड इफेक्ट के लंबे समय तक राहत प्रदान कर सकते हैं। हालांकि, यदि दर्द गंभीर हो, तो किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श करना अत्यंत आवश्यक है।
About Author
You may also like
हिंदुस्तान जिंक में Gen-Z को बढ़ावा : 35 वर्ष से कम उम्र के 10 प्रतिशत कर्मचारियों के पास लीडरशिप रोल
हिन्दुस्तान जिंक द्वारा बिछड़ी गांव में कॉमन सर्विस सेंटर का शुभारंभ
झारखंड स्टूडेंट प्रोटेस्ट: विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में टकराव, लाठीचार्ज व आंसू गैस के गोले दागे
मेवाड़ी परम्परा से हुआ ब्रिक्स देशों के विदेशी प्रतिनिधियों का स्वागत: सिटी पैलेस से हुए अभिभूत
बाबा बैद्यनाथ की स्थापना के साथ नारायण सेवा संस्थान में शिव कथा का विराम

