
अजमेर/लेह। राजस्थान के अजमेर की रहने वाली मशहूर अल्ट्रा-मैराथनर सूफिया सूफ़ी (40) ने एक बार फिर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। सूफिया ने दुनिया के सबसे कठिन रास्तों में से एक, मनाली से लेह (430 किलोमीटर) की दूरी को मात्र 98 घंटे और 27 मिनट में पूरा कर नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया है।
अपने ही रिकॉर्ड को दी शिकस्त
यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि सूफिया ने अपना ही 2021 का रिकॉर्ड (156 घंटे) ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने इस बार अपनी पिछली टाइमिंग में लगभग 58 घंटे का सुधार किया, जो उनकी अविश्वसनीय गति और सुधार की ओर इशारा करता है। अब वह इस मार्ग पर सबसे तेज़ दौड़ने वाली दुनिया की पहली महिला बन गई हैं।
मौत को मात देने वाली चुनौतियां
सूफिया का यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने अपनी दौड़ के दौरान कई ऐसी बाधाओं का सामना किया जो किसी भी एथलीट के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं:
अत्यधिक ऊंचाई : 17,000 फीट से अधिक की ऊँचाई पर दौड़ते हुए उन्होंने 5 दुर्गम पहाड़ी दर्रों को पार किया।
ऑक्सीजन की कमी : ऊंचाई पर हवा में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से 56% तक कम था, जिससे सांस लेना भी एक संघर्ष बन गया था।
हाड़ कंपाने वाली ठंड : शून्य से नीचे (सब-जीरो) गिरते तापमान और बर्फीली हवाओं के बीच उन्होंने अपनी दौड़ जारी रखी।
अदम्य साहस और प्रेरणा
सूफिया की इस जीत ने न केवल उनकी शारीरिक सहनशक्ति को साबित किया है, बल्कि उनकी मानसिक दृढ़ता का लोहा भी मनवाया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी विषम परिस्थितियों में लगातार दौड़ना मानव शरीर की सीमाओं को चुनौती देने जैसा है।
“यह जीत सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की है जो बड़े सपने देखने का साहस करता है। परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, अगर आपका आत्मविश्वास अडिग है, तो हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।” — सूफिया सूफ़ी
अजमेर की इस बेटी की सफलता ने देश के युवाओं, विशेषकर महिला एथलीटों के लिए प्रेरणा का एक नया पैमाना तय किया है।
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