
उदयपुर। शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व पार्षद डॉ. विजय विप्लवी ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया की कार्यप्रणाली पर गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़े किए हैं। पत्र में उदयपुर के उनके बार-बार दौरों के दौरान कथित प्रशासनिक और राजनीतिक दखल का मुद्दा उठाते हुए हस्तक्षेप की वैधता पर सवाल उठाया गया है।
डॉ. विप्लवी ने आरोप लगाया कि राज्यपाल बनने के बाद से कटारिया हर महीने करीब एक सप्ताह या उससे अधिक समय उदयपुर में बिताते हैं, जिससे स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
सर्किट हाउस में कथित तौर पर “जनता दरबार” लगाकर जनसुनवाई करना और प्राप्त आवेदनों पर स्थानीय प्रशासन व पुलिस को निर्देश देना भी पत्र में प्रमुख आपत्ति के रूप में दर्ज किया गया है।
पत्र में कहा गया है कि लगातार दौरों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भागीदारी के कारण सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू होता है, जिससे यातायात बाधित होता है और आम लोगों को असुविधा झेलनी पड़ती है।
डॉ. विप्लवी ने आरोप लगाया कि राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुए छोटे स्तर के कार्यों—जैसे नगर निगम के टेम्पो स्टैंड शेड के जीर्णोद्धार—का लोकार्पण करना पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
इसके अलावा उदयपुर के विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में, जहां राज्य का कुलाधिपति मौजूद रहता है, वहां उनकी मंच उपस्थिति को भी अनुचित बताया गया है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि महाराणा प्रताप पर कथित टिप्पणी को लेकर उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी थी। साथ ही एक घटना का हवाला देते हुए प्रोटोकॉल की अनदेखी और बिना सुरक्षा के राजनीतिक समूह के बीच जाने का भी आरोप लगाया गया है।
कुछ निकटवर्ती लोगों को भूमि विवाद और अवैध निर्माण मामलों में संरक्षण देने के आरोप भी लगाए गए हैं।
डॉ. विप्लवी ने राष्ट्रपति से राज्यपाल पद की गरिमा बनाए रखने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। साथ ही एक सुझाव देते हुए कहा कि यदि कटारिया का उदयपुर में रहना आवश्यक है, तो उन्हें गुजरात का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है, ताकि वे गांधीनगर से आवागमन कर सकें।
इस पत्र की प्रतियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और राजस्थान के राज्यपाल को भी भेजी गई हैं।
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