
प्रभास पाटन (गुजरात)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोमनाथ मंदिर की विग्रह प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने इस गौरवशाली अवसर पर देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश पर सृजन के संकल्प की विजय गाथा है, जो सदियों के कुत्सित प्रयासों के बाद भी अडिग खड़ा है।
स्वतंत्र भारत की चेतना का उद्घोष
प्रधानमंत्री ने सरदार वल्लभ भाई पटेल को नमन करते हुए कहा कि 1947 में भारत आजाद हुआ था, लेकिन 1951 में सोमनाथ की प्राण प्रतिष्ठा ने देश की स्वतंत्र चेतना का उद्घोष किया। उन्होंने कहा, “सरदार साहब ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण से दुनिया को बताया था कि भारत केवल आजाद नहीं हुआ है, बल्कि अपने प्राचीन गौरव को पुनः हासिल करने के मार्ग पर भी आगे बढ़ चुका है।” ### शक्ति और शिव का अद्भुत संयोग
भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने 11 मई की ऐतिहासिक महत्ता का उल्लेख करते हुए बताया कि आज ही के दिन 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण (ऑपरेशन शक्ति) हुआ था। उन्होंने कहा कि शिव के साथ शक्ति की आराधना हमारी परंपरा रही है। जिस प्रकार चंद्रयान के लैंडिंग पॉइंट को ‘शिवशक्ति’ नाम दिया गया, वैसे ही सोमनाथ (चंद्रमा के स्वामी) और आज का दिन भारत की वैज्ञानिक और आध्यात्मिक शक्ति के मिलन का प्रतीक है।
आक्रांताओं पर वैचारिक प्रहार
इतिहास के पन्नों को पलटते हुए उन्होंने कहा कि महमूद गजनवी और अलाउद्दीन खिलजी जैसे आक्रांताओं ने इस मंदिर को एक भौतिक ढांचा मानकर बार-बार तोड़ने का प्रयास किया। वे यह नहीं जानते थे कि भारत की आत्मा अविनाशी है। उन्होंने राजा भोज, अहिल्याबाई होल्कर और महाराजा दिग्विजय सिंह जैसी विभूतियों के योगदान को याद किया जिन्होंने अलग-अलग कालखंड में इस तीर्थ की परंपरा को जीवित रखा।
विरासत और विकास का नया मॉडल
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज भारत ‘विकास भी और विरासत भी’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल महालोक, केदारनाथ और अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे तीर्थ क्षेत्र केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और प्रगति के बड़े स्रोत हैं।
प्रधानमंत्री का आह्वान: “आज का भारत आत्मविश्वास से भरा है। हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहकर ही आधुनिकता की नई ऊंचाइयों को छूना है। सोमनाथ अमृत महोत्सव केवल अतीत का उत्सव नहीं, बल्कि विकसित भारत के संकल्प का महोत्सव है।”
कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल, हर्ष संघवी सहित अन्य गणमान्य नागरिक और देश-विदेश से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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