
मामला दर्ज होने पर बोली– “पीछे हटने वाले नहीं, यह तो बस शुरुआत है
उदयपुर। उदयपुर नगर निगम क्षेत्र में पिछले तीन दशकों (30 साल) से अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने के लिए कांग्रेस ने इस बार पूरी ताकत झोंक दी है। नगर निगम आयुक्त के चैंबर में हुए तीखे हंगामे और उसके बाद कांग्रेस के दिग्गज नेताओं पर दर्ज हुए मुकदमे ने यह साफ कर दिया है कि आगामी निगम चुनावों में इस बार मुकाबला बेहद आक्रामक और आर-पार का होने वाला है। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वे जनता के मुद्दों पर झुकने वाले नहीं हैं।
निगम आयुक्त से विवाद के बाद पूर्व विधायक व जिलाध्यक्ष समेत 6 पर केस
उदयपुर नगर निगम परिसर में गुरुवार को हुए हंगामे के मामले में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है। सूरजपोल थाने के एएसआई चंद्रभान सिंह भाटी की रिपोर्ट पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष फतेहसिंह राठौड़, पूर्व विधायक त्रिलोक पूर्बिया, पंकज शर्मा, महिला नेता नजमा मेवाफरोश सहित अन्य के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने (राजकार्य बाधा) का नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, धरने के बाद आयुक्त अभिषेक खन्ना के चैंबर में ज्ञापन देने के दौरान कांग्रेसी कार्यकर्ता कुर्सियों पर चढ़ गए थे और उन्होंने तीखी नोकझोंक करते हुए राजकार्य में बाधा पहुंचाई।

कांग्रेस का पलटवार : “केस दर्ज होने से नहीं डरते, यह तो सिर्फ शुरुआत है”
इस पुलिसिया कार्रवाई पर कांग्रेस बैकफुट पर जाने के बजाय और अधिक हमलावर नजर आ रही है। कांग्रेस के रणनीतिकारों और पदाधिकारियों का कहना है:
लड़ाई आर-पार की : “यह मुकदमा तो महज एक शुरुआत है। शहर के विकास और आम जनता के हक की लड़ाई में अगर हमारे खिलाफ एक नहीं, बल्कि कई मुकदमे भी दर्ज हो जाएं, तो भी हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।”
आवाज दबाने की कोशिश : जिलाध्यक्ष फतेहसिंह राठौड़ ने कहा कि कार्यकर्ता के कुर्सी पर चढ़ते ही हमने उसे डांटकर उतार दिया था, लेकिन यह कार्रवाई पूरी तरह राजनीतिक दबाव में की गई है। नगर निगम में फैले भ्रष्टाचार की पोल खुलने के डर से कांग्रेस की आवाज दबाई जा रही है।
राजनीतिक मायने : मौका भी है और दस्तूर भी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले 30 सालों से निगम की सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
भाजपा के अनुकूल माहौल का फायदा : राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार भाजपा का अंदरूनी संगठन भी कुछ हद तक कांग्रेस के अनुकूल दिखाई दे रहा है, जिसका फायदा उठाकर कांग्रेस शहर के मुद्दों पर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
कार्यकर्ताओं में नया जोश : कमिश्नर के चैंबर में जिस तरह कांग्रेस नेताओं ने आक्रामकता दिखाई, उसने यह संदेश दे दिया है कि कांग्रेस अब रक्षात्मक मूड से बाहर निकलकर फ्रंट फुट पर खेलने को तैयार है।
सूरजपोल थानाधिकारी रतनसिंह के अनुसार, घटनाक्रम से जुड़े सभी वीडियो फुटेज मंगवाकर जांच की जा रही है और गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, इस मुकदमों की राजनीति ने उदयपुर में निगम चुनाव से ठीक पहले सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
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