
उदयपुर। उदयपुर की प्रसिद्ध फतहसागर झील में डूबे अनाज व्यापारी ललित मेहता (62 वर्ष) का शव घटना के तीसरे दिन, मंगलवार सुबह करीब 7:00 बजे बरामद कर लिया गया है। पिछले 48 घंटों से सिविल डिफेंस की टीम लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही थी। अंततः मंगलवार सुबह झील में बने फाउंटेन (फव्वारे) के पास से उनका शव बाहर निकाला गया, जिसे अंबामाता थाना पुलिस को सौंप दिया गया है। पुलिस पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद शव परिजनों के सुपुर्द करेगी।
अशोकनगर निवासी ललित मेहता धानमंडी में अनाज ट्रेडिंग का व्यवसाय करते थे। वे क्षेत्र के एक अनुभवी और बेहतरीन तैराक माने जाते थे। पिछले 20 वर्षों से वे नियमित रूप से फतहसागर झील में तैराकी कर रहे थे और कई अन्य लोगों को भी तैराकी के गुर सिखाते थे। ऐसे कुशल तैराक की डूबने से मौत होना हर किसी को स्तब्ध कर रहा है।
रविवार सुबह से थे लापता, झील किनारे मिला था सामान
परिजनों के अनुसार, ललित मेहता रविवार सुबह करीब 8:00 बजे हमेशा की तरह फतहसागर झील पहुंचे थे। करीब डेढ़ घंटे बाद भी जब उन्होंने फोन नहीं उठाया, तो परिजनों को चिंता हुई। तलाश करते हुए जब परिजन झील किनारे पहुंचे, तो वहां उनकी गाड़ी, कपड़े और मोबाइल सहित अन्य सामान मिला।
सूचना मिलने पर अंबामाता थाना पुलिस और नागरिक सुरक्षा विभाग (सिविल डिफेंस) की टीम मौके पर पहुंची। पहले दिन करीब 7 घंटे तक झील के अलग-अलग हिस्सों में तलाश की गई, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। सोमवार को भी दिनभर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा और आखिरकार मंगलवार सुबह सफलता मिली।
सीसीटीवी में आए नजर, 5 महीने पहले हुआ था हार्ट का ऑपरेशन
झील किनारे लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर सामने आया कि मेहता रविवार सुबह करीब 8:00 बजे फतहसागर पहुंचे थे। वहां उन्होंने पहले नियमित व्यायाम किया और फिर पानी में उतरे।
खुद एक परफेक्ट तैराक होने के बावजूद उनकी डूबने से मौत कैसे हुई, इसके सटीक कारणों का पता लगाया जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि उन्होंने लंबी छलांग लगाई होगी और झील की गहराई में स्थित झाड़ियों या वनस्पति में फंस गए होंगे। वहीं सिविल डिफेंस के सदस्य कैलाश मेनारिया ने बताया कि परिजनों के मुताबिक, करीब 5 महीने पहले ही ललित मेहता के दिल का ऑपरेशन हुआ था और स्टेंट डाला गया था। पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है।
उदयपुर के फतेहसागर झील से इस वक्त की बड़ी खबर 48 घंटे पूर्व ललित मेहता (तैराक) का शव आखिरकार बाहर निकल ही गया। दो दिवस से निरंतर प्रयास कर रही सिविल डिफेंस एसडीआरएफ की टीम ने राहत की सांस ली। आज मंगलवार प्रातः 6:30 बजे ललित मेहता का शव फाउंटेन के पास बरामद हुआ टीम में गोताखोर विपुल चौधरी, नरेश चौधरी विजय नकवाल भवानी, शंकर वाल्मीकि, रवि शर्मा, कैलाश गमेती बोट ऑपरेटर कैलाश मेनारिया चालक प्रकाश राठौड़ सहित कई अन्य सदस्य शामिल रहे। पुराने गोताखोर छोटू भाई हेला की टीम के सदस्य भी शव को तलाशने में मौजूद थे।
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