
उदयपुर। कोयला और खान मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने सोमवार को राजस्थान में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स का दौरा किया। विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक और शीर्ष चांदी उत्पादक कंपनियों में शामिल हिंदुस्तान जिंक की सिंदेसर खुर्द माइन और दरीबा स्मेल्टिंग की संचालन प्रणाली, आधुनिक तकनीक और सामाजिक विकास कार्यों की उन्होंने सराहना की।
यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में कंपनी की भूमिका को रेखांकित करती है। हिंदुस्तान जिंक प्रति वर्ष 1.1 मिलियन टन से अधिक धातु उत्पादन के साथ घरेलू वैल्यू चेन को मजबूत बना रही है।
अत्याधुनिक तकनीक और देश की पहली महिला माइन रेस्क्यू टीम को सराहा
केंद्रीय मंत्री ने विश्व की सबसे बड़ी और आधुनिक अंडरग्राउंड चांदी खदानों में से एक सिंदेसर खुर्द माइन और दरीबा स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स का अवलोकन किया।

तकनीक का प्रदर्शन: उन्होंने कंट्रोल रूम, सेल हाउस, कैथोड यार्ड और प्रोडक्ट गैलरी देखी। रिमोट से चलने वाली मशीनों और उपकरणों के लाइव प्रदर्शन के साथ-साथ उन्होंने देश की पहली महिला माइन रेस्क्यू टीम के लाइव डेमो की विशेष सराहना की।
विशेष प्रेजेंटेशन: कॉन्फ्रेंस हॉल में वीडियो और प्रेजेंटेशन के जरिए खदान के इतिहास, सुरक्षा नियमों, पेस्ट फिलिंग और टेली-रिमोट ऑपरेशन्स की जानकारी ली।
दौरे के दौरान हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा और कोयला एवं खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक बाजपेयी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
हिंदुस्तान जिंक जिम्मेदार खनन का बेहतरीन उदाहरण: जी. किशन रेड्डी
जी. किशन रेड्डी ने कहा, “हिंदुस्तान जिंक का संचालन यह दिखाता है कि भारत एक आधुनिक, जिम्मेदार और आत्मनिर्भर माइनिंग क्षेत्र बनाने की दिशा में किस प्रकार प्रगति कर रहा है। कंपनी का आधुनिक टेक्नोलॉजी, बेहतरीन कामकाज, सुरक्षा और सामाजिक विकास पर बल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर और विकसित भारत 2047 के सपने के अनुरूप है।”
श्रमिकों के साथ कैंटीन में लिया दोपहर का भोजन
दौरे के दौरान एक खास पल तब आया जब जी. किशन रेड्डी ने सिंदेसर खुर्द माइन की वर्कर कैंटीन में 54 ‘जिंक रत्न‘ श्रमिकों के साथ बैठकर दोपहर का भोजन किया। इस दौरान उन्होंने वहां कार्यरत महिला माइनिंग इंजीनियरों और अन्य कर्मचारियों से भी मुलाकात की और देश की तरक्की में उनके योगदान को सराहा।
CSR पहलों की समीक्षा : ऊंची उड़ान के युवाओं से की बात
केंद्रीय मंत्री ने कंपनी के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) स्टॉल का दौरा कर समुदाय विकास के कार्यों को देखा :
सखी परियोजना : महिलाओं को आत्मनिर्भर और उद्यमी बनाने का प्रयास।
शिक्षा संबल और ऊंची उड़ान : बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना। उन्होंने ‘ऊंची उड़ान’ से लाभान्वित उन युवाओं से भी बातचीत की जो आज कोल इंडिया जैसी बड़ी कंपनियों में सफल करियर बना चुके हैं।
अन्य सेवाएं : मोबाइल हेल्थ वैन, कैंसर स्क्रीनिंग, स्वच्छ पेयजल के लिए आरओ वॉटर एटीएम और जिंक फुटबॉल अकादमी की महिला खिलाड़ियों से जुड़ी परियोजनाओं की जानकारी ली।
दौरे के अंत में उन्होंने दरीबा माइंस की महिला कर्मचारियों से माइनिंग क्षेत्र में महिलाओं की सशक्त भूमिका और देश की प्रगति में टेक्नोलॉजी के उपयोग पर चर्चा की। हिंदुस्तान जिंक न केवल खनन में, बल्कि स्थानीय समुदायों को साथ लेकर, पर्यावरण संरक्षण, कम कार्बन उत्सर्जन और जल बचत के माध्यम से देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में बड़ा योगदान दे रही है।
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