
गाजा में इजरायली हमले में 9 की मौत, अमेरिका में इजरायल-लेबनान संघर्ष विराम पर सहमति
यरूशलेम/वाशिंगटन। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चल रहा तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है. एक तरफ जहां अमेरिका में इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम (Ceasefire) समझौते के क्रियान्वयन को लेकर सहमति बनी है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी-ईरानी संघर्षों और गाजा में जारी खूनी खेल ने इस शांति प्रक्रिया की परीक्षा ले ली है.
बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात इजरायली युद्धक विमानों ने गाजा पट्टी में भारी तबाही मचाई है, जबकि वाशिंगटन में बंद कमरों के पीछे कूटनीतिक बातचीत का दौर जारी है.
गाजा में सोते हुए लोगों पर बरसे बम, 4 बच्चों सहित 9 की मौत
गाजा सिटी से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायली वायुसेना ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के रिहायशी अपार्टमेंट्स को निशाना बनाकर चार हवाई हमले किए. ये हमले उस वक्त हुए जब लोग अपने घरों में सो रहे थे.
भारी हताहत: अल-शिफा अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, इन हमलों में अब तक 4 बच्चों सहित कम से कम 9 फिलिस्तीनियों की दर्दनाक मौत हो चुकी है.
झुलसे हुए लोग: हमलों के बाद इमारतों में भीषण आग लग गई, जिससे कई परिवार अंदर ही फंस गए. बचाए गए कई लोगों की हालत गंभीर है और वे बुरी तरह झुलस चुके हैं.
संघर्ष विराम का उल्लंघन: गाजा के सरकारी मीडिया ऑफिस का दावा है कि पिछले साल अक्टूबर में घोषित हुए संघर्ष विराम के बाद से इजरायल 3,000 से अधिक बार इसका उल्लंघन कर चुका है, जिसमें 900 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.
वाशिंगटन में इजरायल-लेबनान समझौता; हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण की मांग
अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी विदेश विभाग की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई.
पुरानी डील पर मुहर: अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह कोई नया संघर्ष विराम नहीं है, बल्कि मई में तय हुए युद्धविराम के नियमों का पूरी तरह पालन करने की एक नई प्रतिबद्धता है. इसके तहत लिटानी नदी के दक्षिणी क्षेत्र से हिजबुल्लाह लड़ाकों को पूरी तरह पीछे हटना होगा.
पायलट जोन का निर्माण: समझौते के तहत कुछ खास ‘पायलट जोन’ बनाए जाएंगे, जहां केवल लेबनान की आधिकारिक सेना का नियंत्रण होगा और किसी भी अन्य सशस्त्र संगठन (जैसे हिजबुल्लाह) की मौजूदगी प्रतिबंधित रहेगी.
इजरायल की सख्त शर्त: वाशिंगटन में इजरायल के राजदूत येहिएल लाइटर ने साफ किया कि यह संघर्ष विराम पूरी तरह से तभी प्रभावी रहेगा जब हिजबुल्लाह का पूरी तरह से निरस्त्रीकरण (Complete Dismantling) कर दिया जाए.
हिजबुल्लाह की आशंका: विशेषज्ञों का कहना है कि हिजबुल्लाह इस बात की गारंटी चाहेगा कि यदि वे दक्षिण लेबनान खाली करते हैं, तो क्या इजरायल लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करेगा और बेरुत में उन पर हमले रोकेगा?
🇺🇸 अमेरिकी कांग्रेस में ट्रंप के ‘वॉर पावर्स’ को सीमित करने का प्रस्ताव पास
ईरान के साथ बढ़ते तनाव और संघर्षों के बीच अमेरिकी संसद (House of Representatives) में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध शक्तियों (War Powers) पर अंकुश लगाने का एक प्रस्ताव 215 के मुकाबले 208 वोटों से पास हो गया है. यह प्रस्ताव राष्ट्रपति को ईरान के साथ किसी भी सैन्य संघर्ष या शत्रुता से अमेरिकी सेना को पीछे हटाने के लिए बाध्य करता है. इस प्रस्ताव के पक्ष में चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी अपनी ही पार्टी के खिलाफ जाकर वोट किया.
संघर्ष विराम की उम्मीद से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटीं
इजरायल और लेबनान के बीच वाशिंगटन में हुई बातचीत और संघर्ष विराम समझौते को मजबूत करने की खबरों का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर देखने को मिला है. ईरान के साथ चल रहे इस व्यापक क्षेत्रीय तनाव के बीच कूटनीतिक सफलता की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतें नीचे आई हैं. ब्रेंट क्रूड (Brent crude) 0.69 प्रतिशत गिरकर $97.14 प्रति बैरल और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ $95.40 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है.
🇩🇪 यूएन सुरक्षा परिषद में जर्मनी की हार; ‘फिलिस्तीन विरोधी नीति’ पड़ी भारी
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के पूर्व अधिकारी क्रेग मोखीबर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की सीट के लिए हुए चुनाव में जर्मनी की करारी हार को “न्याय का एक दुर्लभ क्षण” बताया है. जर्मनी को सुरक्षा परिषद की सदस्यता के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला और उसे केवल 104 वोट प्राप्त हुए. मोखीबर के अनुसार, फिलिस्तीन में इजरायली कार्रवाई का अंधाधुंध समर्थन करने और जर्मनी के भीतर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की आवाज दबाने के कारण दुनिया के देशों ने जर्मनी के खिलाफ वोट किया है.
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