दिल्ली में सड़क से संसद तक महासंग्राम

 

पीएम आवास के बाहर राहुल-अखिलेश हिरासत में, जंतर-मंतर पर CJP का मोर्चा कायम, मेदांता शिफ्ट हुए वांगचुक

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली इस समय देश की सबसे बड़ी राजनीतिक और छात्र-आंदोलन की आंच में झुलस रही है। नीट परीक्षा में धांधली, पेपर लीक और शिक्षा विभाग के रवैये को लेकर फैला असंतोष अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विपक्षी दलों और जन-आंदोलनों के गठजोड़ से एक राष्ट्रव्यापी राजनीतिक संकट का रूप ले चुका है। मंगलवार को जहां एक तरफ प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव सहित शीर्ष विपक्षी नेताओं का अप्रत्याशित धरना और पुलिस द्वारा उन्हें जबरन उठाकर हिरासत में लिए जाने का ड्रामा चला, वहीं दूसरी तरफ जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और 24वें दिन भी अनशन पर डटे सोनम वांगचुक के रुख ने केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

पीएम आवास पर ‘सरप्राइज मार्च’: लाठीचार्ज और राहुल गांधी को हाथ-पैर पकड़कर ले गई पुलिस

दिल्ली में मंगलवार को सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम तब देखने को मिला जब कांग्रेस और विपक्षी दलों ने पीएम आवास का अप्रत्याशित घेराव किया।

रणनीतिक सीक्रेट प्लान : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सुबह पुलिस कार्रवाई के विरोध में अपना जन्मदिन न मनाने की घोषणा की। उन्हें बधाई देने के बहाने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी उनके आवास पहुंचे। वहां से पीएम आवास की दूरी महज एक किलोमीटर थी। सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देते हुए सभी नेता अचानक पैदल ही पीएम आवास की ओर निकल पड़े, जिससे पुलिस को बैरिकेडिंग का मौका ही नहीं मिला।

सरकार से बेनतीजा बातचीत: धरनास्थल पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और गृह सचिव गोविंद मोहन ने राहुल गांधी से दो बार बातचीत की। जितेंद्र सिंह के अनुसार, सरकार नीट पर संसद में चर्चा कराने के लिए तैयार थी, लेकिन राहुल गांधी अपनी मांग पर अड़ गए कि चर्चा के साथ-साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी जरूरी है।

हाई-ड्रामा और गिरफ्तारी: सहमति न बनने पर करीब 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को घेर लिया। राहुल गांधी सड़क पर लेट गए, जिसके बाद 12 से ज्यादा जवानों ने उनके हाथ-पैर पकड़कर जबरन उठाकर बस में बैठाया। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव को छत्रसाल स्टेडियम में रखा गया, जहां से रात करीब 9:45 बजे उन्हें रिहा किया गया। वहीं प्रियंका गांधी को मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया, जिनसे मिलने सोनिया गांधी खुद पहुंचीं।

जंतर-मंतर पर CJP का कड़ा रुख: “अब बात करने सरकार खुद आए”

संसद मार्च के बाद पुलिस कार्रवाई झेलने के बावजूद जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन दूसरे दिन और तीव्र हो गया।

सरकार के साथ वार्ता बंद: CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने साफ कर दिया कि अब उनका कोई भी प्रतिनिधि सरकार के पास बातचीत के लिए नहीं जाएगा, बल्कि सरकार को खुद जंतर-मंतर पर आकर बात करनी होगी। उन्होंने घायलों से माफी मांगते हुए उन्हें कानूनी मदद देने का भरोसा दिया।

आंतरिक अनुशासन और विवाद: CJP ने संसद मार्च के दौरान संवेदनहीनता दिखाते हुए बर्गर खाने वाले अपने प्रवक्ता विजेता दाहिया को पद से हटा दिया।

विपक्ष का महाजुटान: जंतर-मंतर पर घायल छात्रों और प्रदर्शनकारियों से मिलने अखिलेश यादव, डिंपल यादव, शरद पवार, सुप्रिया सुले, उद्धव ठाकरे, अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह जैसे दिग्गज नेता पहुंचे, जिससे आंदोलन को बड़ा राजनीतिक बल मिला है।

सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत: मेदांता ICU में भर्ती, अनशन जारी

24 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। दिल्ली हाईकोर्ट के हस्तक्षेप और आदेश के बाद उन्हें दिल्ली के अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल के ICU में शिफ्ट किया गया है, जहां डॉ. सुशीला कटारिया की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है। वांगचुक में खून की कमी के लक्षण पाए गए हैं, लेकिन उन्होंने पुलिस बर्बरता के खिलाफ अस्पताल में भी अपना अनशन जारी रखने का ऐलान किया है।

केंद्र सरकार का रुख : “पेपर लीक पर न हो राजनीति”

बढ़ते दबाव के बीच एनडीए (NDA) संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि पेपर लीक के मुद्दे पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। सरकार का दावा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।

हालांकि, राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती कराए गए 186 घायलों (जिन्हें पुलिस और छात्र दोनों शामिल हैं) के आंकड़े यह बताने के लिए काफी हैं कि यह संघर्ष आने वाले दिनों में और अधिक तीखा होने वाला है।

दिल्ली की सड़कों पर घटा यह पूरा घटनाक्रम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि नीट और परीक्षा प्रणालियों में कथित भ्रष्टाचार अब एक विस्फोटक जनांदोलन बन चुका है। एक तरफ जहां मुख्य विपक्षी दल सड़क पर उतरकर आक्रामक तेवर दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गैर-राजनीतिक युवाओं और CJP का स्वतःस्फूर्त मोर्चा सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था और साख के सामने अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो गया है।

 

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