
उदयपुर। उदयपुर की प्रसिद्ध स्वरूपसागर झील सोमवार की सुबह एक बेहद भावुक और संवेदनशील मोड़ की गवाह बनी। बीमारियों के असहनीय बोझ से टूट चुकी 56 वर्षीय विमला जी ने निराशा में आकर झील में छलांग लगा दी। उस वक्त जब जिंदगी और मौत के बीच फासला मिट रहा था, तब दो अनजान युवकों के साहस और ‘कालिका गश्ती टीम’ की जांबाज़ी ने एक मां को नया जीवन दे दिया।
जान पर खेलकर झील में कूदे दो ‘फरिश्ते’
सुबह करीब 9 बजे पार्क में लोग रोजमर्रा की तरह टहल रहे थे, तभी अचानक पानी में छपाक की आवाज हुई। विमला जी को डूबते देख वहां अफरा-तफरी मच गई। अधिकांश लोग जब तक स्थिति को समझते, तब तक पार्क में मौजूद दो साहसी युवकों ने बिना एक पल गंवाए अपनी जान जोखिम में डालकर झील के गहरे पानी में छलांग लगा दी।
दोनों युवकों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए संघर्ष कर विमला जी को सुरक्षित पानी से बाहर खींच निकाला। अगर ये दोनों युवक समय पर अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में न कूदते, तो शायद कोई बड़ा हादसा हो सकता था।
खाकी के पीछे छुपा ‘मां’ का कलेजा : 200 मीटर बेतहाशा दौड़ीं हेड कॉन्स्टेबल भंवर कुंवर
युवकों द्वारा महिला को बाहर निकालते ही इलाके में मुस्तैदी से गश्त कर रही महिला पुलिस की ‘कालिका गश्ती टीम’ तुरंत मौके पर पहुंच गई। महिला को बदहवास और जिंदगी व मौत के बीच झूलते देख टीम की हेड कॉन्स्टेबल भंवर कुंवर और कॉन्स्टेबल सुनीता का दिल पसीज गया।
घटनास्थल पर एंबुलेंस के आने का इंतजार करने में एक-एक सेकंड जिंदगी पर भारी पड़ रहा था। ऐसे नाजुक वक्त में हेड कॉन्स्टेबल भंवर कुंवर ने अभूतपूर्व तत्परता दिखाई। वे बिना अपनी वर्दी और पद की चिंता किए पास के ऑटो स्टैंड की तरफ लगभग 200 मीटर बेतहाशा दौड़ पड़ीं और तुरंत एक ऑटो लेकर मौके पर लौटीं।
समय पर अस्पताल पहुंचाकर बचाई जान
कॉन्स्टेबल सुनीता, हेड कॉन्स्टेबल भंवर कुंवर और वहां मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए विमला जी को ऑटो में बैठाया और सीधे महाराणा भूपाल (एमबी) अस्पताल के ट्रॉमा इमरजेंसी वार्ड पहुंचाया। कालिका टीम की इस सूझबूझ और फुर्ती की बदौलत महिला को समय पर डॉक्टरों का इलाज मिल सका, जिससे उनकी डूबती सांसों को थाम लिया गया।
डॉक्टर बेटे-बहू और एक टूटता मन
अस्पताल में जब सूचना पाकर विमला जी के बेटे और बहू पहुंचे, तो माहौल बेहद भावुक हो उठा। पेशे से दोनों डॉक्टर हैं—दूसरों को जीवनदान देने वाले ये बच्चे इस बात से बेखबर थे कि उनकी अस्वस्थ मां घर से चुपचाप निकलकर जीवन लीला समाप्त करने जैसा आत्मघाती कदम उठाने जा रही थीं।
फिलहाल एमबी अस्पताल में विमला जी की हालत स्थिर बताई जा रही है। शहर भर में उन दोनों साहसी अज्ञात युवकों के जज्बे और कालिका टीम की हेड कॉन्स्टेबल भंवर कुंवर व कॉन्स्टेबल सुनीता की इस मानवीय मुस्तैदी की जमकर सराहना हो रही है।
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