
उदयपुर। ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों के राजकीय विद्यालयों में बुनियादी शिक्षा को मजबूती देने और सीखने के स्तर को बेहतर बनाने में ‘शिक्षा संबल कार्यक्रम’ एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। हिंदुस्तान जिंक के सहयोग से संचालित इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत वर्तमान में 75 सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की अलख जगाई जा रही है। इस परियोजना के जरिए 60 से अधिक फेलो और फील्ड पर्सनल शिक्षकों की तैनाती की गई है, जो दूरदराज के क्षेत्रों में बच्चों के शैक्षणिक स्तर को संवारने में जुटे हैं।
नियमित कक्षाएं और रेमेडियल टीचिंग से सुधरे बोर्ड व वार्षिक परिणाम
शिक्षा संबल के तहत नियुक्त शिक्षकों की सक्रियता का सीधा असर विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन पर दिख रहा है:
सुधारात्मक कक्षाओं का सहारा: नियुक्त शिक्षकों द्वारा नियमित कक्षाओं के साथ-साथ कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग और रेमेडियल (उपचारात्मक) कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इससे बच्चों के बुनियादी कॉन्सेप्ट मजबूत हुए हैं और उनके सीखने के स्तर (लर्निंग आउटकम) में निरंतर सकारात्मक बदलाव आया है।
शिक्षकों की आधुनिक ट्रेनिंग: शिक्षकों की दक्षता बढ़ाने के लिए नियमित प्रशिक्षण, मेंटरिंग और क्लासरूम सपोर्ट उपलब्ध कराया जाता है। इसके जरिए शिक्षकों को अध्यापन के नए, नवाचारी और प्रभावी तौर-तरीके सिखाए जाते हैं, जिससे कक्षाओं में पढ़ाई का माहौल रुचिकर बना है।
नामांकन और रिजल्ट सुधारने वाले 12 उत्कृष्ट शिक्षक सम्मानित
परियोजना के सकारात्मक प्रभावों के बीच समर्पित भाव से कार्य करने वाले शिक्षकों का उत्साहवर्धन भी किया गया:
सराहनीय योगदान की पहचान: अपने-अपने विद्यालयों में परीक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार लाने और छात्र नामांकन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने वाले 12 शिक्षा संबल शिक्षकों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
समर्पण को प्रोत्साहन: आयोजकों ने कहा कि यह सम्मान विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों के समर्पण, लगन और अथक परिश्रम की सच्ची पहचान है।
इस पहल से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों का विश्वास बढ़ा है, बल्कि साधनहीन परिवेश से आने वाले विद्यार्थियों को भी प्रतिस्पर्धी शिक्षा का अवसर मिल रहा है।
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