
उदयपुर। नगर निकाय आम चुनाव-2026 के तहत उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों की चुनावी बिसात पूरी तरह बिछ चुकी है। नाम वापसी के अंतिम दिन 52 प्रत्याशियों द्वारा मैदान छोड़ने के बाद अब चुनावी समर में कुल 220 उम्मीदवार शेष रह गए हैं। नाम वापसी की मियाद खत्म होने के साथ ही शहर के सभी वार्डों में मुकाबले की अंतिम तस्वीर साफ हो गई है, जहां मुख्य जंग भाजपा और कांग्रेस के बीच तय है, वहीं कुछ वार्डों में माकपा और निर्दलीय दोनों प्रमुख दलों का गणित उलझा रहे हैं।
नामांकन से अंतिम मुकाबले तक का चुनावी सफर
जिला निर्वाचन अधिकारी गौरव अग्रवाल के अनुसार:
नामांकन का दौर: प्रक्रिया के दौरान कुल 333 प्रत्याशियों ने 379 नामांकन पत्र दाखिल किए थे।
संवीक्षा व निरस्तीकरण: दस्तावेजों की जांच व संवीक्षा (स्क्रूटनी) के दौरान 74 नामांकन पत्र विभिन्न तकनीकी कारणों से खारिज कर दिए गए।
वैध नामांकन व नाम वापसी: 272 वैध प्रत्याशी मैदान में बचे थे, जिनमें से 52 अभ्यर्थियों ने नाम वापसी के अंतिम दिन अपने पर्चे वापस उठा लिए। अब मैदान में 220 प्रत्याशी ताल ठोक रहे हैं।
14 बागी बने दोनों दलों के लिए गले की फांस
संगठनात्मक मान-मनौव्वल और वरिष्ठ नेताओं की समझाइश के बावजूद दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के 14 बागी अभी भी निर्दलीय के तौर पर मैदान में डटे हुए हैं:
कांग्रेस की बड़ी चुनौती: कांग्रेस के 12 असंतुष्ट नेता बागी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं, जो पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशियों के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।
भाजपा में 2 बागी: भाजपा के भी 2 प्रमुख बागी प्रत्याशी चुनावी अखाड़े में डटे हैं, जिससे कुछ वार्डों में त्रिकोणीय समीकरण बनते दिख रहे हैं।
इसके अलावा माकपा (CPI-M) और अन्य स्वतंत्र निर्दलीयों की मौजूदगी ने कई वार्डों में चुनावी मुकाबले को बहुकोणीय और रोचक बना दिया है।
अब घर-घर सघन जनसंपर्क पर फोकस
चुनावी चिह्नों के आवंटन के साथ ही अब सभी प्रत्याशियों और दलों ने अपना पूरा ध्यान डोर-टू-डोर जनसंपर्क पर केंद्रित कर दिया है। लवाजमे और नुक्कड़ सभाओं के बजाय उम्मीदवार वार्डों की तंग गलियों और मोहल्लों में मतदाताओं से सीधा संपर्क साधने, स्थानीय समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाने और बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने की रणनीति पर जुट गए हैं।
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