
नई दिल्ली। मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक विक्रम भट्ट ने हाल ही में उदयपुर जेल में बिताए अपने 70 दिनों के बेहद कठिन और झकझोर देने वाले अनुभवों को साझा किया है। इंदिरा आईवीएफ (Indira IVF) के संस्थापक अजय मुर्डिया की दिवंगत पत्नी इंदिरा मुर्डिया की बायोपिक से जुड़े एक वित्तीय विवाद के सिलसिले में गिरफ्तार हुए विक्रम भट्ट इस साल फरवरी में जमानत पर बाहर आए थे। अब उन्होंने जेल की सलाखों के पीछे झेली गई शारीरिक प्रताड़ना, गंभीर स्वास्थ्य संकट और वहां मिले अप्रत्याशित इंसानी साथ पर खुलकर बात की है।
सिद्धार्थ कनन को दिए एक इंटरव्यू में विक्रम भट्ट ने बताया कि कैसे दिसंबर और जनवरी की कड़कड़ाती ठंड में जेल के भीतर वो मौत के मुंह से वापस लौटे।
ठंड से कांपता रहता था, पीलिया हुआ पर अस्पताल नहीं ले गए
विक्रम भट्ट ने जेल के उस डरावने दौर को याद करते हुए बताया कि वह ‘एक्सियल स्पॉन्डिलाइिटिस’ (Axial Spondyloarthritis) नाम की एक ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित हैं, जिसमें जोड़ों और मांसपेशियों में असहनीय दर्द होता है। ऐसे में जेल के फर्श पर सिर्फ एक चटाई के सहारे रातें काटना उनके लिए किसी दुःस्वप्न जैसा था।
अस्पताल ले जाने से इनकार: विक्रम भट्ट ने बताया, “मैं जेल में लगभग मर ही गया था। कड़कड़ाती ठंड के बीच मुझे पीलिया (Jaundice) हो गया। मैं जेल प्रशासन से गिड़गिड़ाता रहा कि मुझे अस्पताल ले जाएं, लेकिन वो ‘कल-परसों’ कहकर टालते रहे। प्रशासन का कहना था कि उनके पास मुझे ले जाने के लिए पर्याप्त गार्ड और सुरक्षा व्यवस्था नहीं है।”
कैदियों ने बचाई जान : जब सिस्टम ने हाथ खड़े कर दिए, तब बैरक के आम कैदी विक्रम के रक्षक बने। उन्होंने बताया, “रात में मुझे इतना तेज बुखार आता था कि बैरक के साथी अपनी कंबल भी मुझे ओढ़ने के लिए दे देते थे। जब मुझे लगा कि जेल प्रशासन मुझे अस्पताल नहीं भेजेगा, तो मैंने खुद ही उबला हुआ खाना, चना और फल खाकर, और भगवान को याद करके खुद को संभाला।”
कैदियों में दिखा ‘असली हिंदुस्तान’, बुलाते थे ‘भीष्म पितामह’
विक्रम भट्ट ने बताया कि वह जेल में करीब 60 से 80 कैदियों के साथ एक ही बैरक में बंद थे। वहां मिले प्यार ने उनके मन से क्लास (वर्गभेद) की दीवार को हमेशा के लिए गिरा दिया।
“वहाँ मैंने एक अलग ही हिंदुस्तान देखा। जिन लोगों से आपको हमदर्दी की उम्मीद नहीं होती, वे सबसे दयालु निकले। कैदी मुझे ‘भीष्म पितामह’ कहते थे। वो मुझसे कोई काम नहीं करने देते थे, मेरे कपड़े और खाना तक वही लाते थे। हर रात 60-65 लोग इकट्ठा होते और कहते—’पितामह, बस यहाँ बैठिए और हमें कोई भूतिया कहानी सुनाइए।’ उन्होंने अपनी जान पर खेलकर मेरी हिफाजत की। यह मेरे लिए उस जनता से दोबारा जुड़ने का जरिया बना, जो हमारी फिल्में देखने सिनेमाघरों में जाती है।”
बॉलीवुड से किसने बढ़ाया मदद का हाथ?
जेल से बाहर आने के बाद फिल्म इंडस्ट्री के रवैये पर बात करते हुए विक्रम ने बताया कि मिथुन चक्रवर्ती और उनके बचपन के दोस्त अजय देवगन ने उनका हालचाल जाना। वहीं संजय दत्त ने भी फोन किया, भले ही विक्रम ने उनके साथ कभी काम नहीं किया था। हालांकि, जब अक्षय कुमार (जिनके साथ उन्होंने दो फिल्में की हैं) के बारे में पूछा गया, तो विक्रम ने बेबाकी से कहा, “उन्होंने मुझे फोन क्यों भला करेंगे? वह मेरे दोस्त नहीं हैं।”
क्या है पूरा मामला?
विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को दिसंबर 2025 में उदयपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आरोप था कि अजय मुर्डिया और विक्रम के बीच एक बायोपिक और एक ऐतिहासिक युद्ध फिल्म को लेकर बातचीत हुई थी, लेकिन बाद में पैसों के लेनदेन को लेकर विवाद बढ़ गया। इस मामले पर विक्रम भट्ट का कहना है कि चार्जशीट पूरी तरह बेबुनियाद है और उन्हें अदालत पर पूरा भरोसा है कि सच सामने आएगा।
वर्क फ्रंट : विक्रम भट्ट इन दिनों अपनी आगामी हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘हॉन्टेड 3D: इकोज ऑफ द पास्ट’ (Haunted 2) की रिलीज की तैयारियों में जुटे हैं, जो 12 जून को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है।
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