
उदयपुर। कानून की आत्मा उस वक्त तड़प उठती है जब किसी बेगुनाह को एक ऐसे संगीन जुर्म के साए में धकेल दिया जाता है, जो उसने कभी किया ही नहीं। समाज में सुरक्षा और न्याय के लिए बने कानूनों का जब निजी दुश्मनी, बदले की भावना या किसी को तबाह करने के लिए ढाल की तरह इस्तेमाल किया जाता है, तो सिर्फ एक इंसान की जिंदगी नहीं बिखरती, बल्कि पूरे न्याय तंत्र का भरोसा डगमगा जाता है। कुछ ऐसा ही संवेदनशील और कड़ा संदेश देने वाला फैसला उदयपुर की अदालत ने सुनाया है, जहां बलात्कार जैसे घिनौने अपराध के झूठे मुकदमे दर्ज करवाकर बेगुनाहों की जिंदगी नर्क बनाने वाली चार महिलाओं/प्रार्थियों को सजा सुनाई गई है।
न्यायालय के इस कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि किसी बेगुनाह की साख और इज्जत से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती।
उदयपुर की जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन (IPS) की संवेदनशीलता और कड़े रुख के कारण आज समाज के सामने यह सच आ पाया है। उनके निर्देशन में पुलिस ने एक विशेष अभियान चलाया, जिसका मकसद उन लोगों पर नकेल कसना था जो झूठे मुकदमे दर्ज करवाकर निर्दोषों को प्रताड़ित करते हैं।
इसी अभियान के तहत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) उमेश ओझा और वृत्ताधिकारी वृत्त नगर पूर्व छवि शर्मा के निकट पर्यवेक्षण में सूरजपोल थानाधिकारी रतन सिंह चौहान ने एक बड़ी और अनुकरणीय पहल की। पुलिस टीम ने पूरी गहराई से उन मामलों की तफ्तीश की जहां महिलाओं ने बलात्कार या अन्य मनगढ़ंत कहानियां गढ़कर केस दर्ज करवाए थे। जब जांच में सच के चेहरे से झूठ का नकाब उतरा, तो पुलिस ने इन झूठे मामले दर्ज कराने वालों के खिलाफ माननीय न्यायालय में इस्तगासा पेश कर दिया, ताकि कानून और वक्त दोनों की बर्बादी करने वालों को सबक मिल सके।
न्याय की चौखट पर बेनकाब हुए 4 झूठे मामले
माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, उदयपुर और माननीय विशिष्ट न्यायालय पोक्सो एक्ट प्रकरण क्रम संख्या 02, उदयपुर ने मामलों की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों (झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने वाली महिलाओं/प्रार्थियों) को 1000-1000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। इन चार मामलों की दास्तां किसी को भी अंदर तक झकझोर देगी कि कैसे निजी खुन्नस के लिए किसी की जिंदगी दांव पर लगा दी गई:
अगस्त 2023 का दंश : एक प्रार्थी ने अपनी ही सगी पुत्री को मोहरा बनाकर देव नलवाया नाम के व्यक्ति के विरुद्ध बलात्कार का झूठा मुकदमा दर्ज करवा दिया था। एक बाप अपनी बेटी की आड़ में किसी की जिंदगी बर्बाद करने पर उतारू था, जिसका पर्दाफाश हुआ।
दिसंबर 2024 की साजिश : कुनाल खटीक व अन्य लोगों को समाज की नजरों में गिराने और जेल की सलाखों के पीछे भेजने के लिए एक प्रार्थी ने फिर अपनी बेटी के साथ बलात्कार का झूठा ताना-बाना बुना।
फरवरी 2026 की प्रताड़ना : अम्बाला (सराडा, जिला सलुम्बर) के रहने वाले प्रवीण मीणा नाम के युवक के खिलाफ एक प्रार्थिया ने प्रतिशोध की भावना से ग्रसित होकर बलात्कार का झूठा केस दर्ज करवाया, जिससे उस युवक को सामाजिक और मानसिक यातनाएं झेलनी पड़ीं।
अप्रैल 2026 का फरेब : सिलावटवाड़ी, उदयपुर के माजिद खान के खिलाफ एक महिला ने झूठी कहानी गढ़कर बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराया था, जो जांच में पूरी तरह से बेबुनियाद पाया गया।
“भविष्य में मिलेगी जेल की सजा”: पुलिस की सख्त चेतावनी
इस ऐतिहासिक कार्रवाई के बाद उदयपुर पुलिस ने समाज के उन चेहरों को कड़ी चेतावनी दी है जो कानून को खिलौना समझते हैं। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नवीन आपराधिक कानून (भारतीय न्याय संहिता) के तहत भविष्य में भी ऐसे झूठे मुकदमे दर्ज कराने वाले व्यक्तियों के खिलाफ माननीय न्यायालय में धारा 217 एवं 248 बीएनएस (BNS) 2023 के तहत सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
अब केवल जुर्माना नहीं, बल्कि ऐसे साजिशकर्ताओं को जेल की सलाखों के पीछे भेजकर कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी। न्यायालय का यह कदम उन सभी बेगुनाहों के जख्मों पर मरहम है जिन्होंने बिना किसी गलती के समाज में बदनामी और मानसिक अवसाद का सामना किया है।
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