
उदयपुर। तेजी से बदलती औद्योगिक तकनीकों और उद्योग 4.0 (इंडस्ट्री 4.0) की आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप कुशल डिप्लोमा इंजीनियर तैयार करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। विद्या भवन के सरस्वती मेकेट्रोनिक्स सेंटर में डिप्लोमा इंजीनियरिंग इंटर्न के विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का शनिवार को विधिवत शुभारंभ हुआ।
स्वचालित मशीनों के दौर में ‘स्मार्ट इंजीनियर’ ही सफल : डॉ. अनिल मेहता
उद्घाटन सत्र को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनिल मेहता ने समसामयिक औद्योगिक परिदृश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
“आज ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, सीमेंट, स्टील, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल, फूड प्रोसेसिंग, केमिकल, जल प्रबंधन, ऊर्जा और माइनिंग समेत तमाम मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों का परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। अब हर जगह स्वचालित (ऑटोमैटिक) मशीनों और डिजिटल नियंत्रण प्रणालियों के सहारे ही उत्पादन हो रहा है। ऐसे दौर में किसी भी स्मार्ट फैक्ट्री को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्मार्ट इंजीनियरों का होना बेहद जरूरी है।”
डॉ. मेहता ने आधुनिक प्रणालियों की तकनीकी महत्ता को समझाते हुए विस्तार से बताया-पीएलसी (PLC): यह आधुनिक मशीनों एवं उत्पादन लाइनों के सटीक नियंत्रण का काम करता है।
स्काडा (SCADA): संपूर्ण औद्योगिक प्रक्रिया की वास्तविक समय (रियल टाइम) में निगरानी एवं नियंत्रण सुनिश्चित करता है।
सीएनसी (CNC): उच्च परिशुद्धता (हाई प्रिसिजन) वाले औद्योगिक उत्पादों के निर्माण का मुख्य आधार है।
न्यूमेटिक एवं हाइड्रोलिक प्रणालियां: रोबोटिक्स, प्रेस मशीनों, मटेरियल हैंडलिंग तथा ऑटोमेशन पर आधारित उत्पादन इकाइयों के संचालन में रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करती हैं।
सरस्वती सिंघल फाउंडेशन का आभार, मानवीय मूल्यों पर जोर
डॉ. मेहता ने जानकारी दी कि सरस्वती सिंघल फाउंडेशन ने इस मेक्ट्रोनिक्स सेंटर की स्थापना कर क्षेत्र के तकनीकी युवाओं के लिए वैश्विक स्तर की ज्ञान व प्रशिक्षण सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध करवाई है। उन्होंने इस केंद्र के प्रेरणास्रोत व विख्यात उद्योगपति सलिल सिंघल के प्रति विशेष कृतज्ञता व्यक्त की।
प्राचार्य ने प्रशिक्षणार्थियों (इंटर्न्स) से आह्वान किया कि वे इस सुनहरे अवसर का पूरा लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि केवल मशीनी ज्ञान ही काफी नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी तकनीकी दक्षता के साथ-साथ ईमानदारी, अनुशासन, जिम्मेदारी, सकारात्मक कार्य संस्कृति और मानवीय मूल्यों का भी विकास करना चाहिए, जो उन्हें एक सफल प्रोफेशनल बनाएंगे।
इंडस्ट्री की जरूरत: टीम वर्क और व्यावहारिक दृष्टिकोण
समारोह में पूर्व उद्योग प्रबंधक एम.एस. राणावत ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आज के समय में उद्योग ऐसे इंजीनियरों को प्राथमिकता देते हैं जिनमें तकनीकी कौशल के साथ-साथ संगठनात्मक कार्य संस्कृति (ऑर्गेनाइजेशनल कल्चर) को समझने और पूरी टीम के साथ मिलकर प्रभावी ढंग से कार्य करने की क्षमता हो।
वहीं, इलेक्ट्रिकल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रकाश सुंदरम ने कहा कि इस पूरे प्रशिक्षण का एकमात्र ध्येय विद्यार्थियों को स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल उत्पादन प्रणालियों के व्यावहारिक क्रियान्वयन के अनुरूप पूरी तरह से दक्ष और आत्मनिर्भर बनाना है।
इन अत्याधुनिक विधाओं का मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
संस्थान के मुख्य प्रशिक्षक इंजीनियर नितिन सनाढ्य, गौरांग शर्मा, अमित कुशवाहा, रमेश चंद्र कुम्हार और पंकज कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से बताया कि इस इंटर्नशिप के दौरान प्रतिभागियों को थ्योरी से आगे ले जाकर पूरी तरह से व्यावहारिक (हैंड्स-ऑन) ट्रेनिंग दी जाएगी।
प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर (PLC), सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (SCADA), सीएनसी प्रोग्रामिंग, इंडस्ट्रियल सेंसर, कंट्रोल पैनल, न्यूमेटिक्स, हाइड्रोलिक्स तथा इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन।
सॉफ्ट स्किल्स और कॉर्पोरेट ट्रेनिंग : तकनीकी ज्ञान के अलावा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के लिए ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर, इंटरपर्सनल स्किल्स, टाइम मैनेजमेंट, प्रॉब्लम सॉल्विंग एप्टीट्यूड (समस्या समाधान क्षमता), टीम वर्क और प्रोफेशनल एथिक्स का भी गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे विद्यार्थी भविष्य में उद्योगों की कार्य संस्कृति के अनुरूप एक जिम्मेदार, अनुशासित, नवाचारी एवं समाधान-उन्मुख इंजीनियर के रूप में देश के विकास में अपना योगदान दे सकेंगे।
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