
धौलपुर। कहते हैं कि एक स्वस्थ समाज की नींव बच्चों की किलकारियों और माताओं की मुस्कान में छुपी होती है। लेकिन जब गरीबी और जागरूकता की कमी के कारण किसी मासूम का बचपन कुपोषण की बेड़ियों में जकड़ जाए, या एक मां अपने ही आंचल को स्वस्थ रखने के लिए संघर्ष करे, तो यह केवल एक परिवार की नहीं बल्कि पूरे समाज की पीड़ा बन जाती है। राजस्थान के आकांक्षी जिले धौलपुर में इसी दर्द को मिटाने और हर बच्चे को जीवन की एक मजबूत व स्वस्थ शुरुआत देने के लिए एक बेहद संवेदनशील और मानवीय पहल का आगाज हुआ है।
वेदांता समूह के अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के तहत काम करने वाली संस्था ‘नंद घर’ ने धौलपुर में ‘परियोजना बालवर्धन’ की शुरुआत की है। इस पुनीत कार्य में हाथ मिलाने के लिए उन्होंने स्वयंसेवी संस्था ‘आईपीई ग्लोबल – सीकेडी’ के साथ एक ऐसी साझेदारी की है, जिसका सीधा उद्देश्य कागजों से परे जाकर धरातल पर जिंदगियां बदलना है।
क्यों धौलपुर के आंचल को है इस स्नेह की जरूरत?
धौलपुर की पहचान एक ऐतिहासिक और आकांक्षी जिले के रूप में है, लेकिन इसके पीछे छिपी जमीनी हकीकत यह भी है कि यहां आज भी कई मासूम कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) के सन्नाटे में जी रहे हैं। कई माताएं सही पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में कमजोर रह जाती हैं।
‘परियोजना बालवर्धन’ इसी कमी को दूर करने के लिए ममता और तकनीक का एक अनूठा संगम बनकर आई है। इसके मुख्य बिंदु दिल को छूने वाले हैं:
हर बच्चे को मिले पोषण का हक: इस परियोजना का मूल मंत्र बच्चों को केवल भोजन देना नहीं, बल्कि उनके शुरुआती बाल्यकाल की ऐसी देखभाल करना है जिससे वे शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बन सकें।
माताओं की सेहत की फिक्र: माताओं में एनीमिया की जांच करना, उन्हें निवारक स्वास्थ्य सेवाएं देना और पूरक पोषण व राशन वितरण को अंतिम छोर तक पारदर्शी बनाना इस अभियान का दिल है।
संबल बनेंगे डिजिटल हाथ: गांवों में अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को डिजिटल टूल्स और विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे हर घर की जरूरत को समझकर उन तक मदद पहुंचा सकें।
“यह उम्मीदों का नया सवेरा है” — प्रशासनिक और सामाजिक आवाजें
इस भावुक मुहिम पर धौलपुर के जिला कलेक्टर श्रीनिधि बी. टी. (IAS) ने उम्मीद जताते हुए कहा:
“कुपोषण के खिलाफ इस लड़ाई में जब तक प्रशासन, समाज और विकास भागीदार एक साथ दिल से नहीं जुड़ेंगे, तब तक स्थायी बदलाव संभव नहीं है। नंद घर की यह पहल हमारे जमीनी कार्यकर्ताओं के हाथों को मजबूत करेगी, जो हर गांव के आखिरी घर तक खुशहाली पहुंचाने का जरिया हैं।”
वहीं, आईपीई ग्लोबल-सीकेडी के चीफ मेंटर एम. के. पद्मा कुमार ने भावुक स्वर में कहा, “जीवन के शुरुआती चरण बहुत नाजुक होते हैं। हमारा यह साझा संकल्प केवल एक सरकारी लक्ष्य को पूरा करना नहीं है, बल्कि हर उस बच्चे को जीवन की एक सुरक्षित और मजबूत शुरुआत देना है जो इसका हकदार है।”
चेयरमैन अनिल अग्रवाल के दृष्टिकोण से सजेगा बचपन
नंद घर की सीईओ शशि अरोड़ा ने इस परियोजना के पीछे की संवेदना को साझा करते हुए कहा कि उनके चेयरमैन अनिल अग्रवाल का हमेशा से यह सपना रहा है कि देश का कोई भी बच्चा अवसरों से वंचित न रहे। वैज्ञानिक और मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर, यह परियोजना न केवल आज की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि गांव की महिलाओं को आत्मविश्वास देकर उन्हें समाज में बदलाव का मुख्य चेहरा बनाएगी।
एक मां जैसा आंचल फैलाए हैं ‘नंद घर’ : देश के 17 राज्यों में 14,000 से अधिक केंद्रों के माध्यम से ‘नंद घर’ आज लाखों बच्चों और माताओं के जीवन में उजाला फैला रहा है। धौलपुर जिले में भी ऐसे 400 से अधिक केंद्र पहले से ही बच्चों की किलकारियों से गूंज रहे हैं। अब ‘परियोजना बालवर्धन’ के जरिए इस प्रयास को एक नया विस्तार और गहराई मिलेगी, ताकि भविष्य में इस आंसुओं को पोंछने वाले मॉडल को पूरे देश में लागू किया जा सके।
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