कूटनीतिक शिखर सम्मेलन: ‘विकसित भारत’ और ‘इंडोनेशिया एमास’ के संकल्प को पूरा करने के लिए पीएम मोदी ने दिया साझा समृद्धि का मंत्र

जकार्ता/नई दिल्ली।

इंडोनेशिया गणराज्य की राजकीय यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति इस्ताना मरदेका (राष्ट्रपति प्रासाद) में इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो और दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों की उपस्थिति में द्विपक्षीय वार्ता के बाद एक महत्वपूर्ण संयुक्त प्रेस वक्तव्य दिया। प्रधानमंत्री ने भारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक संबंधों को याद करते हुए दोनों देशों के वर्तमान साझा विश्वास और भविष्य की साझा समृद्धि के आधार पर द्विपक्षीय संबंधों के एक नए सुनहरे अध्याय की शुरुआत की घोषणा की।

प्रधानमंत्री मोदी को इस यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी नवाजा गया, जिसे उन्होंने कोटि-कोटि भारतवासियों और दोनों देशों के आत्मीय संबंधों का सम्मान बताया।

रक्षा, समुद्री सुरक्षा और ब्लू इकोनॉमी पर बड़ा फैसला

दोनों देशों के बीच बढ़ता रणनीतिक विश्वास अब रक्षा और सुरक्षा को नए आयाम दे रहा है:

  • कोस्ट गार्ड्स का साझा अभियान: हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा (Maritime Safety and Security) को और मजबूत करने के लिए अब भारत और इंडोनेशिया के कोस्ट गार्ड्स मिलकर काम करेंगे।

  • ब्लू इकोनॉमी और डिफेंस: दोनों देशों ने डिफेंस एक्सचेंज, पोर्ट डेवलपमेंट, मैरीटाइम ट्रेड, डिज़ास्टर मैनेजमेंट और ब्लू इकोनॉमी में आपसी सहयोग बढ़ाने पर अंतिम सहमति जताई है।

जन-कल्याण और खाद्य सुरक्षा: भारत साझा करेगा अपनी योजनाएं

गरीबी उन्मूलन और आम नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना दोनों देशों की सर्वोच्च प्राथमिकता है:

  • मिड-डे मील और खाद्य आपूर्ति: भारत सरकार इंडोनेशिया के साथ अपनी सफल ‘मिड-डे मील’ (Mid-day Meal) योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तकनीकी समाधान साझा कर रही है।

  • कृषि और स्वास्थ्य सहयोग: भारत में विकसित किए गए उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं के बीजों की सप्लाई इंडोनेशिया को की जाएगी, जिससे वहां की खाद्य सुरक्षा (Food Security) मजबूत होगी। इसके अलावा, भारत की किफायती दवाइयां इंडोनेशिया के नागरिकों को आसानी से उपलब्ध होंगी और भारतीय विशेषज्ञ वहां के स्वास्थ्य कर्मियों की कैपेसिटी बिल्डिंग में सहयोग करेंगे।

टेक्नोलॉजी, स्पेस और एजुकेशन: इंडोनेशिया में खुलेगा IIM बेंगलुरु का कैंपस

21वीं सदी को टेक्नोलॉजी ड्रिवन बताते हुए प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के युवाओं के लिए कई बड़े समझौतों की घोषणा की:

  • IIM बेंगलुरु का नया कैंपस: आसियान (ASEAN) क्षेत्र के युवाओं को विश्व स्तरीय शिक्षा देने के उद्देश्य से इंडोनेशिया में भारत के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान IIM बेंगलुरु का नया कैंपस खोला जाएगा।

  • डिजिटल और स्पेस एग्रीमेंट: दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), टेलीकॉम और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अहम समझौते हुए हैं। साथ ही भारत की ‘UPI’ को इंडोनेशिया के पेमेंट सिस्टम के साथ इंटीग्रेट किया जा रहा है, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों आसान होंगे।

  • स्पेस और सप्लाई चैन: अंतरिक्ष क्षेत्र में ज्वाइंट रिसर्च और टेक्नोलॉजी शेयरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा, क्रिटिकल मिनरल्स, स्टेनलेस स्टील और रेयर अर्थ मैग्नेट के क्षेत्र में मजबूत सप्लाई चैन बनाने को लेकर भी समझौता हुआ है।

साझा सांस्कृतिक विरासत: प्रम्बानन मंदिर का संरक्षण और टैगोर शताब्दी वर्ष

भारत और इंडोनेशिया अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सहेजने के लिए मिलकर काम करेंगे:

  • प्रम्बानन मंदिर कंजर्वेशन: एक हजार साल से भी अधिक पुराने ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण प्रोजेक्ट को दोनों नेता मिलकर लॉन्च करेंगे।

  • टैगोर-देवांतारा सांस्कृतिक वर्ष: गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की ऐतिहासिक इंडोनेशिया यात्रा के शताब्दी वर्ष के अवसर पर दोनों देश संयुक्त रूप से “टैगोर और देवांतारा सांस्कृतिक एवं शैक्षिक कूटनीति वर्ष” मनाएंगे।

वैश्विक मुद्दों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ‘आसियान केंद्रीयता’ (ASEAN Centrality) और डायलॉग व डिप्लोमेसी के महत्व को दोहराया। उन्होंने फिलिस्तीन के विषय पर ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ (Two-State Solution) और दीर्घकालिक शांति का पुरजोर समर्थन किया।

About Author

Leave a Reply