
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीवन में सफलता, विनम्रता और समाज कल्याण के महत्व को रेखांकित करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक प्राचीन संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है. प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि जीवन में मिलने वाली सफलता और समृद्धि तभी सार्थक मानी जा सकती है, जब वह लोक कल्याण तथा समाज के उत्थान की भावना से प्रेरित हो.
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया संस्कृत श्लोक
प्रधानमंत्री ने जीवन में परोपकार की महत्ता को दर्शाने वाले इस श्लोक को रेखांकित किया:
$$ भवन्ति\ नम्रास्तरवः\ फलोद्गमैर्नवाम्बुभि-र्दूर-विलम्बिनो\ घनाः। $$
$$ अनुद्धताः\ सत्पुरुषाः\ समृद्धिभिः\ स्वभाव\ एवैष\ परोपकारिणाम्॥ $$
सुभाषितम् का गूढ़ अर्थ: प्रकृति से सीखें विनम्रता
इस प्रसिद्ध सुभाषितम् के माध्यम से प्रकृति के सुंदर उदाहरणों द्वारा मनुष्य को जीवन का सबसे बड़ा संदेश दिया गया है:
वृक्ष और बादल का उदाहरण: जिस प्रकार फलों के आने (फलोद्गम) से लदे हुए वृक्ष नीचे की ओर झुक जाते हैं और नए जल (वर्षा) से भरे हुए बादल स्वाभाविक रूप से धरती के करीब आ जाते हैं, ठीक वैसा ही व्यवहार श्रेष्ठ मनुष्यों का भी होता है.
सच्चे परोपकारी की पहचान: महान और परोपकारी व्यक्ति जीवन में अत्यधिक धन, अगाध ज्ञान, उच्च पद या बड़ी प्रसिद्धि (समृद्धि) प्राप्त करने के बाद भी किसी प्रकार का अहंकार नहीं करते. वे सदैव विनम्र बने रहते हैं.
संसाधनों का समाज कल्याण में उपयोग: ऐसे व्यक्ति अपनी सफलताओं, क्षमताओं और संचित अनुभवों का उपयोग स्वयं के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए नहीं, बल्कि समाज के जरूरतमंदों के उत्थान और कल्याण के लिए करते हैं. यह सुभाषितम् हमें यह सीख देता है कि वास्तविक महानता केवल धन-दौलत में नहीं, बल्कि सेवा-भाव में होती है.
सफलता तभी सार्थक, जब लोककल्याण सर्वोपरि हो
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में लिखा कि समृद्धि की असली सुंदरता केवल वैभव में नहीं, बल्कि दूसरों के प्रति विनम्र रहने और परोपकार करने में निहित है. उन्होंने कहा कि हमारी सफलता तभी सच्चे अर्थों में मूल्यवान बनती है जब उसमें लोककल्याण की भावना सर्वोपरि हो.
About Author
You may also like
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विजन : महिला सशक्तिकरण और सस्टेनेबल विकास से समृद्ध हो रहा राजस्थान
अधूरी मूरत में छिपा है पूर्ण जीवन का संदेश : जगन्नाथ रथयात्रा पर वेदांता चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने दी शुभकामनाएं
रिसाइक्लिंग से बदला कल : हिंदुस्तान जिंक ने 23 अरब लीटर पानी को दिया नया जीवन
मेवाड़ की राजसी परंपरा और लोक-आस्था का महासंगम : जब शीतलामाता द्वार पर ठाकुर जी का स्वागत करने उमड़ा पूर्व राजपरिवार
जब परम्परा बनी पूजा और श्रद्धा बनी विरासत… मेवाड़ की सदियों पुरानी राजपरम्परा के तहत डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने श्री जगन्नाथ रायजी को अर्पित किए पोशाक एवं भोग
