रिसाइक्लिंग से बदला कल : हिंदुस्तान जिंक ने 23 अरब लीटर पानी को दिया नया जीवन

उदयपुर। आज के समय में जब पूरी दुनिया के सामने जल संकट एक बड़ी चुनौती है, तब पानी का पुनर्चक्रण (Recycling) ही पर्यावरण को बचाने का सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। इस दिशा में विश्व की अग्रणी जिंक और चांदी उत्पादक कंपनी, हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 में वॉटर रीसाइक्लिंग तकनीक के दम पर पर्यावरण संरक्षण की एक नई और बेहद सकारात्मक मिसाल पेश की है।

पानी की हर एक बूंद को दोबारा इस्तेमाल के योग्य बनाना ही सच्चे मायने में पर्यावरण की सेवा है। हिंदुस्तान जिंक ने अपने संयंत्रों में आधुनिक तकनीकों का समावेश कर जल संरक्षण को अपने कामकाज का मुख्य हिस्सा बना लिया है:

23 अरब लीटर पानी का पुनर्चक्रण : कंपनी ने आधुनिकतम तकनीकों की मदद से इस वित्त वर्ष में लगभग 23 अरब लीटर पानी रीसायकल किया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सस्टेनेबल सोच से कितना बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

49% की शानदार रीसाइक्लिंग दर : बेहतर वॉटर मैनेजमेंट के चलते कंपनी की वार्षिक रीसाइक्लिंग दर बढ़कर 49 प्रतिशत हो गई है। इसका सीधा मतलब है कि उद्योग में इस्तेमाल होने वाले आधे के करीब पानी को दोबारा उपयोग में लाकर ताजे और शुद्ध पानी के स्रोतों को सुरक्षित कर लिया गया है।

एडवांस्ड तकनीकों का बेजोड़ तालमेल : जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) सिस्टम, रिवर्स ऑस्मोसिस (RO), एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) और राजपुरा-दरीबा में शुरू किए गए नए ‘फिल्टर्ड टेलिंग्स प्लांट’ जैसी तकनीकों ने इस रीसाइक्लिंग क्रांति को संभव बनाया है, जिससे अपशिष्ट से 80% से अधिक पानी वापस प्राप्त किया जा रहा है।

कचरे से कंचन : शहरी अपशिष्ट जल का कायाकल्प

रीसाइक्लिंग का सबसे बेहतरीन और सकारात्मक उदाहरण उदयपुर में देखने को मिला है। यहाँ राजस्थान सरकार के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के तहत बने 60 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ने शहर के गंदे पानी की परिभाषा ही बदल दी। शहर के सीवेज (अपशिष्ट जल) को अत्याधुनिक रीसाइक्लिंग प्रोसेस के जरिए औद्योगिक उपयोग के लायक बनाया जा रहा है। इससे न केवल शहर का अपशिष्ट प्रबंधन बेहतर हुआ है, बल्कि फैक्ट्रियों के लिए शुद्ध पेयजल पर निर्भरता भी पूरी तरह खत्म हो गई है।

जिम्मेदार प्रगति और वॉटर पॉजिटिव भविष्य

“भविष्य का खनन केवल उत्पादन से नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग से तय होगा। विकास ऐसा होना चाहिए जो शुद्ध जल पर हमारी निर्भरता को कम करे और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सहेजे।” — अरुण मिश्रा, सीईओ (हिंदुस्तान जिंक)

अपनी इसी रीसाइक्लिंग केंद्रित रणनीति की बदौलत कंपनी ने खुद को 3.32 गुना वॉटर पॉजिटिव बनाए रखा है। यानी कंपनी जितना पानी इस्तेमाल करती है, रीसाइक्लिंग और जल संरक्षण (जैसे तालाबों के पुनर्जीवन और चेक डैम) के जरिए उससे कहीं ज्यादा पानी प्रकृति और समाज को वापस लौटा देती है।

संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता) को पूरा करते हुए हिंदुस्तान जिंक का यह कदम साबित करता है कि अगर सही रीसाइक्लिंग तकनीक और सकारात्मक इच्छाशक्ति हो, तो हम औद्योगिक तरक्की के साथ-साथ अपने पर्यावरण को भी हरा-भरा और सुरक्षित रख सकते हैं।

 

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