नगर-परिक्रमा पर निकले ठाकुरजी : झीलों की नगरी को मिला खुशहाली, अच्छी बारिश और सुहाने मौसम का वरदान

फोटो एंड रिपोर्ट कमल कुमावत उदयपुर। आषाढ़ मास की यह पावन द्वितीया तिथि… हवाओं में


फोटो एंड रिपोर्ट कमल कुमावत

उदयपुर। आषाढ़ मास की यह पावन द्वितीया तिथि… हवाओं में चंदन की भीनी खुशबू, आसमान में उमड़ते बादलों की सुहानी छांव और धरा पर भक्ति का ऐसा समंदर कि हर आंख सजल और हर कंठ निहाल था। मौका था झीलों की नगरी उदयपुर में निकलने वाली देश की तीसरी सबसे बड़ी और राजस्थान की सबसे भव्य ‘भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा’ का।

लेकिन इस बार की यह रथयात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन भर नहीं थी; यह तो साक्षात दयासागर का अपने भक्तों के द्वार तक आना था। मान्यता है कि जब जगत के स्वामी गर्भगृह से निकलकर खुद भक्तों के बीच आते हैं, तो प्रकृति भी निहाल हो उठती है। इस बार भी यही हुआ। रथ पर विराजित होकर जब ठाकुर जी नगर भ्रमण पर निकले, तो वे पूरे उदयपुर को अगले एक साल तक खुशहाली का माहौल और सुहाने मौसम का दिव्य आशीर्वाद दे गए। जो इस महामेले में शामिल होकर रथ की डोरी खींच रहे थे, वे तो धन्य हुए ही, लेकिन जो छतों से, खिड़कियों से या मन के किसी कोने से बस एक झलक को तरस रहे थे, दयालु ठाकुर जी की कृपा-दृष्टि उन पर भी बरस गई।

जब 21 बंदूकों की सलामी से गूंज उठी अरावली की वादियां

शाही ठाठ-बाट, राजसी परंपरा और जन-जन की आस्था का ऐसा अनूठा संगम पहले कभी नहीं देखा गया। जगदीश मंदिर की सीढ़ियों से जब भगवान जगन्नाथ, माता लक्ष्मी और दानीराय जी को पालकी में बिठाकर बाहर लाया गया, तो पूरा उदयपुर ‘जय जगन्नाथ’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

मंदिर परिसर में परंपरा के अनुसार ठाकुर जी को 21 बंदूकों की सलामी दी गई। बंदूकों की कड़कड़ाहट के बीच जैसे ही शंखनाद हुआ, श्रद्धालुओं के रोंगटे खड़े हो गए। इतिहास में पहली बार 375 साल पुराने ऐतिहासिक लकड़ी के रथ और 95 किलो चांदी के भव्य रथ के रूप में आस्था के दो अनूठे स्वरूप एक साथ नगर भ्रमण पर निकले।

श्रद्धा का महासैलाब: छतों पर उमड़ा ‘हृदयपुर’

ओल्ड सिटी के तंग रास्ते आज श्रद्धा के चौड़े हाइवे नजर आ रहे थे। जगदीश चौक, घंटाघर, बड़ा बाजार, भड़भूजा घाटी… जहां तक नजर जाती थी, सिर्फ सिर ही सिर दिखाई दे रहे थे। घरों, दुकानों और होटलों की छतें श्रद्धालुओं से पटी पड़ी थीं।

पुष्पवर्षा का अलौकिक नजारा: जैसे ही ठाकुर जी का रथ नीचे से गुजरता, छतों से फूलों की ऐसी बारिश होती मानो स्वयं देवलोक से देवता फूल बरसा रहे हों।

आरती की लौ छूने की होड़: रथयात्रा के दौरान जैसे ही भगवान की महाआरती होती, महाप्रसाद की महक और दीपों की गर्माहट को अपने हाथों में समेटने के लिए भक्तों में होड़ मच जाती। हर कोई इस दिव्य ऊष्मा को अपने माथे से लगाकर निहाल हो जाना चाहता था।

शाही उपस्थिति: पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने जहां रथ में विराजित प्रभु के दर्शन कर भक्तों का अभिवादन किया, वहीं नाथद्वारा के विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ पूरे रास्ते आम भक्तों के साथ कदम-से-कदम मिलाकर पैदल चलते नजर आए।

इस्कॉन की दिव्य आभा: 5100 दीपों से आलोकित हुआ बेड़ी हनुमान परिसर

गंगू कुंड स्थित इस्कॉन मंदिर से निकली रथयात्रा जब धुलकोट स्थित बेड़ी हनुमान मंदिर पहुंची, तो वहां का नजारा देखते ही बनता था। सांकेतिक रूप से बेड़ी समर्पित करने की अनूठी परंपरा निभाई गई और इसके बाद जब 5100 घी के दीपकों से भगवान जगन्नाथ और बेड़ी हनुमान की महाआरती उतारी गई, तो लगा मानो साक्षात वैकुंठ धरती पर उतर आया हो। आलोक इंटरैक्ट क्लब के बच्चों के भक्तिमय नृत्य ने समां बांध दिया।

जनसेवा की अनूठी मिसाल

भक्ति के इस महासागर में प्यासे कंठों को तृप्त करने के लिए पूरा शहर सेवादार बन गया। जगह-जगह सामाजिक और व्यापारिक संगठनों द्वारा पानी, ठंडे पेय, छाछ, शरबत और जलपान के स्टॉल लगाए गए थे। भक्त ही भगवान की सेवा में थे और भक्त ही भक्तों के सत्कार में।

एक कसक, जो अखर गई:

आस्था के इस पावन समंदर में कुछ विघ्न संतोषी भी सक्रिय रहे। इस्कॉन रथयात्रा के दौरान गंगू कुंड से यूनिवर्सिटी रोड के बीच भीड़ का फायदा उठाकर शातिर बदमाशों ने अंजना देवी (60) और लक्ष्मी देवी (75) नामक दो बुजुर्ग महिलाओं के गले से सोने की चेन पार कर दी। हालांकि, सुरक्षा को लेकर चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात था और छतों से भी संदिग्धों पर पैनी नजर रखी जा रही थी।

विदा हुए प्रभु, छोड़ गए आशीष की छांव

देर रात तक आरएमवी स्कूल में आरती के बाद काला जी-गौरा जी और भटियाणी चौहट्टा होते हुए जब ठाकुर जी का रथ पुनः अपने धाम जगदीश मंदिर पहुंचा, तब तक उदयपुर का जर्रा-जर्रा इस दिव्य ऊर्जा से सराबोर हो चुका था।

ठाकुर जी नगर को निहाल कर गए… हवाओं में अब एक गजब की तरावट है, चेहरों पर सुकून है और दिलों में यह अटूट विश्वास कि जब तक जगदीश की यह अनुकंपा उदयपुर पर है, यहां का मौसम भी सुहाना रहेगा और दिलों का आपसी भाईचारा भी अटूट रहेगा।

जय जगन्नाथ!

यहां देखिए और tasviren

About Author

Leave a Reply