
उदयपुर। “नाम में क्या रखा है?”— शेक्सपियर का यह मशहूर जुमला उदयपुर के नगर निगम और उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA) के अधिकारियों पर बिल्कुल सटीक बैठता है। शहर के व्यस्ततम ठोकर चौराहे की बदहाली को देखकर तो यही लगता है कि जिम्मेदारों ने एक अनोखा तर्क गढ़ लिया है— “हुज़ूर, जब चौराहे का नाम ही ठोकर चौराहा है, तो वहां लोग ठोकर ही खाएंगे न! इसमें हम क्या करें?”
शायद इसी अघोषित और गैर-जिम्मेदाराना सोच के सहारे प्रशासनिक अधिकारी अपनी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं। हमारे फोटो जर्नलिस्ट कमल कुमावत द्वारा खींची गई तस्वीरें इस प्रशासनिक ढिठाई की पोल खोलने के लिए काफी हैं।
एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, यूनिवर्सिटी और मादरी इंडस्ट्रियल एरिया जैसे चार सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन रूट को जोड़ने वाले इस चौराहे को देखकर लगता है कि विभाग इसे ‘आदर्श ठोकर केंद्र’ बनाना चाहता है। टूटी सड़कें, जानलेवा गड्ढे और उड़ती धूल को देखकर ऐसा लगता है कि प्रशासन मान चुका है कि इस चौराहे का नाम सार्थक रखना ही उनका एकमात्र कर्तव्य है। जनता यहां रोज गिर रही है, गाड़ियां टूट रही हैं, लेकिन साहबान इस बात से बेफिक्र हैं कि चलो, नाम तो बदनाम नहीं हुआ!

चालान काटने में मुस्तैद, रास्ता साफ करने में लाचार
चौराहे पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे है। सुबह से शाम तक गाड़ियां रेंगती हैं, जाम का झाम रहता है। लेकिन वहां खड़ी पुलिस का इस अव्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है। उनका एकमात्र लक्ष्य शायद यह रहता है कि ‘ठोकर’ खाकर संभलने वाले वाहनों का चालान कैसे काटा जाए। व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर केवल वसूली में जुटना प्रशासन की नीयत पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
आखिर कलेक्ट्री की जनसुनवाई का ड्रामा क्यों?
जब शहर के नाक के नीचे इतने महत्वपूर्ण चौराहे की सुध लेने वाला कोई नहीं है, तो जिला कलेक्ट्री में हर हफ्ते होने वाली भारी-भरकम ‘जनसुनवाई’ का ढोंग क्यों रचा जाता है? क्या वहां सिर्फ आवेदनों की रद्दी जमा की जाती है?

जनता अब पूछ रही है कि नाम के बहाने काम से भागने की यह परंपरा कब खत्म होगी? अगर नाम के हिसाब से ही व्यवस्था चलनी है, तो फिर जनता टैक्स देना बंद क्यों न कर दे, क्योंकि सरकार का नाम भी तो ‘लोक कल्याणकारी’ है, लेकिन काम इसके बिल्कुल उलट दिख रहा है। जिम्मेदारों को इस ‘ठोकर’ डिप्लोमेसी से बाहर निकलकर तुरंत सड़क सुधारनी होगी, वरना जनता का यह आक्रोश आने वाले वक्त में नेताओं और अफसरों को भारी ठोकर लगाने के लिए तैयार बैठा है।

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