उदयपुर नगर निगम चुनाव : वार्ड 36 में पति-पॉवर के दम पर डिंपल कुंवर का टिकट तय, कार्यकर्ताओं में आक्रोश, बगावत की आहट

उदयपुर। उदयपुर नगर निगम चुनाव के तहत वार्ड संख्या 36 (ओपन महिला) में भारतीय जनता पार्टी की टिकट चयन प्रक्रिया को लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष की ज्वाला भड़क उठी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पूर्व पार्षद भंवर सिंह देवड़ा के राजनीतिक प्रभाव और ‘पति-पॉवर’ के चलते उनकी पत्नी डिंपल कुंवर का टिकट लगभग फाइनल माना जा रहा है। इस संभावित फैसले की खबर लगते ही वार्ड के समर्पित कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों में जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है। कार्यकर्ताओं का सीधा आरोप है कि पार्टी संगठन ने योग्यता, उच्च शिक्षा और दशकों के सांगठनिक अनुभव को दरकिनार कर केवल ‘परिवारवाद’ और ‘पार्षद-पति संस्कृति’ को बढ़ावा देने का रास्ता चुना है।

पार्टी के अंदरूनी हलकों में यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि जब पर्यवेक्षकों की निष्पक्ष रायशुमारी में चार बार भाजपा की जिला महामंत्री रहीं नेत्री डॉ. किरण जैन को निर्विवाद रूप से प्रथम वरीयता पर रखा गया था, तो फिर अंतिम समय में उनके नाम को क्यों दबाया गया?

योग्यता बनाम रबर स्टैंप : डॉ. किरण जैन (एम.ए., पीएच.डी.) पिछले 20 वर्षों से महिला समृद्धि बैंक के अध्यक्ष पद का सफल संचालन कर रही हैं और क्षेत्र में सर्वसमाज के बीच उनकी अपनी स्वतंत्र पहचान है।

वहीं, डिंपल कुंवर एक घरेलू महिला हैं, जिनका पार्टी कार्यक्रमों, आंदोलनों या आम जनता के बीच कोई प्रत्यक्ष जुड़ाव या स्वतंत्र सक्रियता नहीं रही है।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि महिला आरक्षण का मूल उद्देश्य महिलाओं को सक्षम और स्वतंत्र नेतृत्व प्रदान करना था, न कि पूर्व पार्षदों को अपनी पत्नियों के नाम पर ‘रिमोट कंट्रोल’ चलाने का जरिया देना।

वार्ड 36 के आम कार्यकर्ताओं का कहना है कि भंवर सिंह देवड़ा स्वयं दो बार पार्षद रह चुके हैं। ऐसे में जब वार्ड महिला के लिए खुला है, तब भी सत्ता की डोर एक ही परिवार में सीमित रखने की जिद पार्टी के लोकतांत्रिक ढांचे पर बड़ा तमाचा है।

रायशुमारी के दौरान भी कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से बदलाव की मांग उठाई थी।

कार्यकर्ताओं का तर्क है कि वार्ड में जैन, राजपूत, ब्राह्मण, सिंधी और कच्ची बस्तियों का बड़ा मतदाता वर्ग है। ऐसे में एक घरेलू और अप्रत्यक्ष चेहरे को थोपना चुनाव में भाजपा के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।

पार्टी कार्यालय से आ रहे संकेतों के बाद वार्ड 36 के कार्यकर्ताओं और प्रबुद्धजनों ने दो-टूक रुख अपना लिया है। नाराज कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि पार्टी आलाकमान ने जमीनी फीडबैक और पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट को नजरअंदाज कर जबरन ‘पति-पॉवर’ के आधार पर टिकट का फैसला थोपा, तो कार्यकर्ता केवल हाथ पर हाथ धरकर नहीं बैठेंगे। वार्ड में खुलेआम भितरघात और निर्दलीय बगावत की जमीन तैयार हो रही है, जिसका सीधा नुकसान भाजपा को बोर्ड गठन के समय भुगतना पड़ सकता है।

 

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