
उदयपुर। रक्षाबंधन की शाम। फतहसागर की लहरों पर ढलते सूरज की लालिमा बिखर रही थी। नेहरू गार्डन की पुरानी जेटी पर लोग त्योहार की खुशियों में मग्न थे। तभी एक जोरदार छपाक की आवाज के साथ किनारे खड़ी महिलाओं की रूह कंपा देने वाली चीखें गूंज उठीं—”अरे बचाओ… कोई कूदी है!”
‘मैंने देखा, वो छटपटा नहीं रही थी… बस डूब जाना चाहती थी’
घटनास्थल पर मौजूद हिरणमगरी सैटेलाइट के प्रभारी डॉ. नरेंद्र देवल ने उस खौफनाक मंजर को बयां करते हुए बताया:
“हम सब किनारे पर ही खड़े थे। चीख सुनते ही रूह कांप गई। एक पल का भी वक्त नहीं था सोचने का। मैं, तहसीलदार रणजीत सिंह बिट्टू, एडवोकेट दीनबंधु आशिया, बजरंग सिंह कविया और साथी तुरंत उस दिशा में दौड़े। एडवोकेट कविया ने फौरन पानी में छलांग लगाई और उसे पकड़ने की कोशिश की। लेकिन जो नजारा सामने था, उसने हमारे भी होश उड़ा दिए। आम तौर पर डूबने वाला इंसान बचने के लिए हाथ-पैर मारता है, लेकिन यह बच्ची तो मरने की जिद पर अड़ी थी। वह खुद को छुड़ाकर बचाने वाले को ही और गहरे पानी में अंदर खींचने लगी।”
‘मौत के जबड़े से ध्यान भटकाने की वो जंग…’
डॉ. देवल बताते हैं कि पानी में सेकंड-सेकंड की लड़ाई चल रही थी।
“मुझे लगा कि अगर इसे बलपूर्वक खींचा गया तो यह बचाने वाले को भी ले डूबेगी। मैंने पानी के किनारे से ही उससे बात करना शुरू किया। लगातार उससे सवाल पूछने लगा, उसकी बातों में उलझाकर उसका ध्यान भटकाया ताकि उसका वह आत्मघाती आवेश थोड़ा टूटे। उसी दौरान चमनपुरा के रहने वाले मोहम्मद अजहरूद्दीन ने भी बिना सोचे छलांग लगा दी। लोग रस्सियां फेंक रहे थे, बोट वाले तेजी से नाव मोड़कर पहुंचे। हम सबने मिलकर आखिरकार उसे किनारे की तरफ खींच ही लिया।”
‘पेट से पानी निकाला, तब लौटी सांस’
जब युवती को बाहर निकाला गया, वह बेसुध थी और फेफड़ों में पानी भर चुका था। डॉ. देवल ने वहीं जमीन पर उसे उल्टा लिटाया और पेट दबाकर पानी बाहर निकाला। कुछ पलों की भारी जद्दोजहद के बाद जब उसने पहली गहरी सांस ली, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं।
होश में आते ही वह फफक-फफक कर रो पड़ी। रुंधे गले से बोली—”न्यू भूपालपुरा में मेरा घर है… मैं ताला लगाकर और सुसाइड नोट लिखकर ही आई थी… मुझे मत बचाइए।”
डॉक्टर और साथियों ने उसे एक पिता और भाई की तरह ढांढस बंधाया, सीने से लगाया और समझाया कि जिंदगी इतनी सस्ती नहीं होती। इसके बाद उसे सकुशल पुलिस के हवाले किया गया ताकि वह अपनी उस बहन को उसके परिवार तक पहुंचा सकें।
रक्षाबंधन की शाम जब पूरा शहर राखी बांध रहा था, फतहसागर की इस जेटी पर कुछ इंसानों ने एक अनजान बेटी को मौत के मुंह से खींचकर जिंदगी का सबसे अनमोल रक्षासूत्र बांध दिया था। यह समाचार बताने वाले उदयपुर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के आला अधिकारी गौरीकांत शर्मा का भी आभार।
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