टिकट की भागमभाग के बीच त्याग की मिसाल

उदयपुर। उदयपुर नगर निगम चुनाव के लिए जहां एक ओर टिकट पाने के लिए नेताओं में भारी होड़ और पैरवी का दौर चल रहा है, वहीं पूर्व पार्षद एडवोकेट दिनेश गुप्ता ने एक प्रेरक मिसाल पेश की है। पार्टी संगठन की ओर से ‘सुरक्षित और जिताऊ’ वार्ड (वार्ड 26) से चुनाव लड़ने का खुला प्रस्ताव मिलने के बावजूद उन्होंने स्वेच्छा से चुनाव लड़ने से साफ इनकार कर दिया, ताकि जमीनी स्तर पर काम कर रहे अन्य कार्यकर्ताओं को आगे आने का मौका मिल सके।

वार्ड आरक्षण के बाद खुद पीछे हटे, नहीं तलाशा ‘सुरक्षित ठौर’

एडवोकेट दिनेश गुप्ता का मजबूत जनाधार और राजनीतिक प्रभाव वार्ड संख्या 6 में रहा है। वे इसी वार्ड से जनता का प्रतिनिधित्व करना चाहते थे।

आरक्षण के बाद दावेदारी छोड़ी: नए परिसीमन और आरक्षण व्यवस्था के तहत वार्ड संख्या 6 आरक्षित श्रेणी में चला गया। ऐसे में कई नेताओं के विपरीत, जो तुरंत दूसरे वार्डों में बायोडाटा लेकर पहुंच जाते हैं, दिनेश गुप्ता ने किसी अन्य वार्ड से अपनी दावेदारी पेश नहीं की।

पार्टी ने खुद फोन कर दिया था प्रस्ताव, गुप्ता ने दिखाया बड़प्पन

वार्ड 6 आरक्षित होने के बाद पार्टी संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने एक अन्य वार्ड (वार्ड 26) में सामान्य वर्ग के मजबूत और जिताऊ चेहरे की तलाश में दिनेश गुप्ता से फोन पर संपर्क किया। संगठन की ओर से उन्हें उस वार्ड से चुनावी तैयारी करने का आग्रह किया गया।

हालांकि, दिनेश गुप्ता ने पार्टी के इस प्रस्ताव को शालीनता से अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि:

वे केवल अपने मूल क्षेत्र की सेवा के उद्देश्य से सक्रिय थे।

पार्टी को अब उस वार्ड के स्थानीय और नए समर्पित कार्यकर्ताओं को अवसर देना चाहिए, जो लंबे समय से संगठन में मेहनत कर रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में दिनेश गुप्ता के इस निर्णय की सराहना की जा रही है। जहां एक तरफ कई पूर्व पार्षद दो-दो वार्डों से टिकट के लिए परिक्रमा कर रहे हैं, वहीं संगठन के प्रस्ताव को ठुकराकर नए चेहरों के लिए मार्ग प्रशस्त करना स्थानीय राजनीति में स्वस्थ परंपरा का उदाहरण माना जा रहा है। गुप्ता पूर्व चमनपुरा क्षेत्र से पार्षद रहे हैं जो कभी कांग्रेस का गढ़ था। वे विधि समिति अध्यक्ष भी रहे।

 

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