वार्ड 33 से भाजपा प्रत्याशी जतिन श्रीमाली ने मुनि आदित्य सागर जी महाराज के चरणों में नवाया शीश, मांगा सेवा का आशीर्वाद

उदयपुर। चुनावी आपाधापी, नारों के शोर और रणनीति की गहमागहमी के बीच जब कदम संतों की चौखट की ओर मुड़ते हैं, तो राजनीति का उद्देश्य केवल पद पाना नहीं, बल्कि लोककल्याण की साधना बन जाता है। उदयपुर नगर निगम आम चुनाव में वार्ड नंबर 33 से भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी जतिन श्रीमाली ने अपने प्रचार अभियान की शुरुआत से पहले इसी सनातन परंपरा और आस्था का वंदन किया। श्रीमाली ने सेक्टर 11 स्थित आदिनाथ भवन पहुंचकर परम पूज्य श्रुतसंवेगी मुनि श्री 108 आदित्य सागर जी महाराज ससंघ के पावन दर्शन किए और उनके चरणों में नतमस्तक होकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

आदिनाथ भवन का शांत और भक्तिमय वातावरण उस समय और अधिक आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया जब प्रत्याशी जतिन श्रीमाली ने संतों की वंदना कर जनसेवा के इस नए संकल्प के लिए शुभाशीष मांगा।

‘संतों की वाणी जीवन में भरती है संयम और सत्य का प्रकाश’

मुनिश्री के दर्शनोपरांत अत्यंत भावुक और विनीत भाव से जतिन श्रीमाली ने कहा कि संतों का सान्निध्य किसी भी सांसारिक पद या प्रतिष्ठा से कहीं ऊपर है।

“हमारे संस्कार हमें सिखाते हैं कि किसी भी बड़े दायित्व की शुरुआत से पहले गुरुजनों और संतों की छत्रछाया में शीश नवाना चाहिए। पूज्य मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज का पावन सान्निध्य और शुभाशीष पाकर मन को जो शांति और ऊर्जा मिली है, वह अनिर्वचनीय है। संत केवल आशीर्वाद नहीं देते, वे जीवन को संयम, निस्वार्थ सेवा, विनम्रता और सामाजिक समरसता की राह दिखाते हैं। राजनीति मेरे लिए सत्ता की चाह नहीं, बल्कि वार्ड के प्रत्येक परिवार की सेवा का माध्यम है, और यही प्रेरणा मुझे मुनिश्री के चरणों से मिली है।”

आस्था के संबल के साथ जन-जन के द्वार

मुनिश्री से मिले आध्यात्मिक संबल और मार्गदर्शन के बाद प्रत्याशी जतिन श्रीमाली पूरे आत्मविश्वास और सेवाभाव के साथ वार्ड 33 की जनता के बीच पहुंचे। कार्यकर्ताओं का कहना है कि संतों के आशीर्वाद ने पूरी टीम में एक नई सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है। श्रीमाली अब अपने वार्ड के घर-घर जाकर बुजुर्गों का चरण स्पर्श कर रहे हैं और जनसेवा के संकल्प को जन-जन तक पहुंचा रहे हैं।

 

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