मुंबई। क्रिकेट वर्ल्डकप में भारत की टीम चौथी बार फाइनल खेलेगी। इससे पहले भारत 1983 व 2011 में वर्ल्डकप जीत चुका है। 2003 में भी भारत वर्ल्डकप फाइनल खेला था।

मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में बुधवार को खेले गए सेमीफाइनल में मोहम्मद शमी के सात विकेटों की बदौलत न्यूज़ीलैंड को 70 रनों से हरा कर भारत 12 साल बाद फ़ाइनल में पहुंचा।
सेमीफ़ाइनल में भारत ने रिकॉर्ड 397 रन बनाए। जवाब में न्यूज़ीलैंड की पूरी टीम 327 रनों पर पवेलियन लौट गई। यह इस वर्ल्ड कप में भारत की लगातार 10वीं जीत भी है।
भारत की ओर से सबसे अधिक मोहम्मद शमी ने सात विकेट लिए तो न्यूज़ीलैंड की पारी में सबसे बड़ा स्कोर डेरेल मिचेल ने बनाया। उन्होंने 119 गेंदों पर 134 रन बनाए। वहीं कप्तान केन विलियम्सन ने 69 और ग्लेन फिलिप ने 41 रन बनाए।
न्यूज़ीलैंड की पारी के दौरान कप्तान केन विलियम्सन ने डेरेल मिचेल के साथ 181 रनों की साझेदारी निभाई।
इस दौरान डेरेल मिचेल ने केवल 85 गेंदों पर अपना शतक पूरा किया। मिचेल का इस वर्ल्ड कप में यह दूसरा शतक है। उन्होंने भारत के ख़िलाफ़ ही इस वर्ल्ड कप का अपना पहला शतक बनाया था।
जब ये दोनों बल्लेबाज़ पिच पर थे तब ऐसा लग रहा था कि अगर ये कुछ देर और पिच पर ठहरे तो मैच भारत की पकड़ से निकल सकता है।
मोहम्मद शमी ने लिए सात विकेट
आखिरकार शमी ने मैच के 33वें ओवर में यह जोड़ी तोड़ दी। उन्होंने कीवी कप्तान केन विलियम्सन को आउट कर भारत को बड़ी सफलता दिलाई।
इसी ओवर में शमी ने टॉम लैथम को पवेलियन लौटा दिया और एक बार फिर भारतीय टीम और प्रशंसकों में नई जान फूंक दी।
हालांकि इसके बाद ग्लेन फिलिप्स और डेरेल मिचेल ने पांचवे विकेट के लिए 75 रनों की साझेदारी निभाकर एक बार फिर मैच को न्यूज़ीलैंड की तरफ मोड़ने का पूरा प्रयास किया।
इस जोड़ी को जसप्रीत बुमराह ने मैच के 43वें ओवर में तोड़ा।
न्यूज़ीलैंड ने सधे हुए अंदाज में अपनी बल्लेबाज़ी की शुरुआत की पर छठे ओवर में उसके ओपनर डेवन कॉनवे को मोहम्मद शमी ने आउट कर दिया। दो ओवर बाद ही शमी ने दूसरे ओपनर रचिन रवींद्र को भी पवेलियन लौटा दिया।
भारत की ओर से मोहम्मद शमी ने सात तो जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और कुलदीप यादव ने एक-एक विकेट लिए।
मोहम्मद शमी ने सभी टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज़ों डेवन कॉनवे, रचिन रवींद्र, केन विलियम्सन, डेरेल मिचेल, टॉम लैथम के विकेट लिए।
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