
उदयपुर: उदयपुर नगर निगम चुनाव में वार्ड संख्या 45 का चुनावी परिदृश्य इस बार पारंपरिक रैलियों और पुराने ढर्रे के भाषणों से पूरी तरह जुदा नजर आ रहा है। चुनावी शोरगुल के बीच प्रत्याशी दिनेश भट्ट ने सीधे जनसंवाद और भागीदारी लोकतंत्र का एक ऐसा मॉडल जमीन पर उतारा है, जिसने पूरे प्रचार की दिशा बदल दी है। चौपालों और गलियों में सिर्फ वादों की झड़ी लगाने के बजाय वे जनता के बीच पहुंचकर सीधे पूछ रहे हैं—‘आपको कैसा जनप्रतिनिधि चाहिए? आप खाका खींचिए, हम उसी सांचे में ढलकर दिखाएंगे।’
शासक नहीं, सेवक की भूमिका
प्रचार के इस अनूठे तौर-तरीके में सबसे बड़ा बदलाव सोच का है। दिनेश भट्ट का पूरा अभियान ‘जनप्रतिनिधि नहीं, जनता का सच्चा सेवक’ की अवधारणा के इर्द-गिर्द केंद्रित है। मतदाताओं से संवाद के दौरान वे घोषणापत्र थोपने के बजाय स्थानीय निवासियों की राय से वार्ड के विकास का एजेंडा तैयार कर रहे हैं। गली-मोहल्लों में सीधी बैठकों के जरिए वे लोगों की रोजमर्रा की बुनियादी दिक्कतों को न केवल कलमबद्ध कर रहे हैं, बल्कि कई जरूरी समस्याओं का प्रशासनिक समन्वय से मौके पर ही समाधान करवा रहे हैं।
त्रि-सूत्रीय संकल्प: संवाद, समाधान और विकास
अभियान को गति देने के लिए जमीन पर एक स्पष्ट और सीधा संदेश दिया जा रहा है:
बात सुनेंगे: हर नागरिक की शिकायत, सुझाव और अपेक्षा को बिना किसी बिचौलिए के सीधे सुनना।
काम करेंगे: महज कागजी वादे करने के बजाय तय समयसीमा के भीतर समस्याओं का ठोस निस्तारण।
विकास करेंगे: बुनियादी ढांचे, स्वच्छता, रोशनी और सुरक्षित गलियों को वार्ड की प्राथमिकता बनाना।
सीधे जनसंवाद से बदलता माहौल
डोर-टू-डोर कैंपेन के दौरान दिनेश भट्ट का जोर इस बात पर है कि निर्णय प्रक्रिया में आम मतदाता की सक्रिय हिस्सेदारी हो। वार्ड के बुजुर्गों से आशीर्वाद और युवाओं से उनके इलाके के विकास का विजन मांगते हुए वे खुद को एक ऐसे माध्यम के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जो सत्ता की कुर्सी के बजाय जवाबदेही के रास्ते पर चलेगा।
जनता के बीच से एजेंडा तय करवाने और समस्याओं पर तत्काल एक्शन लेने की यह आक्रामक व व्यावहारिक रणनीति वार्ड 45 के मतदाताओं में खासी उत्सुकता जगा रही है। प्रचार का यह सीधा और आकांक्षी स्वरूप स्थानीय निकाय चुनाव को औपचारिकता से निकालकर जनआंदोलन जैसा रूप देने में जुटा है।
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