उदयपुर के वार्ड 24 और 45 में पारस सिंघवी व दिनेश भट्ट के पक्ष में अंतिम घंटों में शक्ति प्रदर्शन, मेयर पद की दावेदारी ने बढ़ाया सियासी तापमान

  उदयपुर। प्रचार के अंतिम पलों में जब चुनावी घड़ियां टिक-टिक कर रही थीं, तब

फोटो जर्नलिस्ट कमल कुमावतउदयपुर। प्रचार के अंतिम पलों में जब चुनावी घड़ियां टिक-टिक कर रही थीं, तब उदयपुर नगर निगम के वार्ड 24 और वार्ड 45 की सड़कें आम नागरिकों और उत्साही कार्यकर्ताओं के सैलाब से पट गईं। यह कोई औपचारिक चुनावी औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ऐसा ऊर्जावान जन-आंदोलन नजर आया जहां जनता और नेतृत्व के बीच की दीवारें पूरी तरह ढह चुकी थीं। वार्ड 24 से भाजपा प्रत्याशी पारस सिंघवी और वार्ड 45 से प्रत्याशी दिनेश भट्ट के समर्थन में निकाली गई विशाल रैलियों ने पूरे शहर के चुनावी विमर्श को बदलकर रख दिया है। दोनों ही दिग्गजों की शहर के सर्वोच्च नागरिक—महापौर (मेयर) पद पर मजबूत दावेदारी ने इस अंतिम शक्ति प्रदर्शन को ऐतिहासिक बना दिया।काफिले नहीं, जनता के साथ सीधा संवाद : हर चौखट पर आत्मीय दस्तकप्रचार थमने के ठीक पहले सड़कों पर उतरा कार्यकर्ताओं का हुजूम किसी शक्ति के प्रदर्शन से ज्यादा एक सामूहिक संकल्प का प्रतीक दिखा। नारों की गूंज और हाथों में लहराते झंडों के बीच सबसे खास बात रही दोनों प्रत्याशियों का मतदाताओं से सीधे आंखें मिलाकर संवाद साधना। पारंपरिक मंचों के खोखले भाषणों को दरकिनार करते हुए पारस सिंघवी और दिनेश भट्ट ने रैली मार्ग के दौरान हर बुजुर्ग के पैर छूकर आशीर्वाद लिया, दुकानदारों से गले मिले और युवाओं के कंधों पर हाथ रखकर उन्हें इस व्यवस्था का असली मालिक बताया।रास्ते में घरों की बालकनियों से फूल बरसाती महिलाओं और रेहड़ी-पटरी वालों से हाथ मिलाते प्रत्याशियों की यह आत्मीयता साफ बयां कर रही थी कि यह चुनाव अब सिर्फ वार्ड का पार्षद चुनने का नहीं, बल्कि पूरे शहर के नीति-निर्धारण को आम आदमी के हाथों में सौंपने का है।मेयर की रेस और नगर की नई दिशा का संकल्पराजनीतिक जानकारों का मानना है कि वार्ड 24 और 45 की यह लड़ाई सामान्य पार्षदी तक सीमित नहीं है। पारस सिंघवी और दिनेश भट्ट दोनों ही नगर निगम के सबसे बड़े पद—मेयर के प्रबल दावेदार के रूप में उभरे हैं। रैलियों में उमड़े अभूतपूर्व जनसमर्थन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कार्यकर्ता और आम जनता केवल अपने वार्ड की गलियां सुधारने के लिए नहीं, बल्कि नगर निगम के पूरे ढांचे को जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए एकजुट हो चुके हैं।अंतिम क्षणों में उमड़े इस जनसैलाब ने यह संदेश साफ कर दिया है कि सत्ता के गलियारों में बैठकर फैसले लेने का दौर अब खत्म होना चाहिए। जब नेतृत्व सीधे सड़कों पर जनता के साथ कदमताल करता है, तो हवा का रुख बदलना तय है। मतदान की दहलीज पर खड़े वार्ड 24 और 45 में अब यह उत्साह मतपेटियों में बड़े बदलाव की इबारत लिखने को तैयार दिख रहा है।वार्ड 24 की तस्वीरें यहां देखिएवार्ड 45 की तस्वीरें यहां dekhiye

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