
उदयपुर। राजस्व ग्राम सवीनाखेड़ा के फूटा तालाब क्षेत्र में सरकारी जमीन को बपौती समझ बैठे अतिक्रमणकारियों पर आखिरकार प्रशासन का बुलडोजर गरज पड़ा। बिना स्वीकृति के जारी अवैध निर्माण कार्यों को हटाने की कार्रवाई आज प्राधिकरण आयुक्त राहुल जैन के निर्देश पर और तहसीलदार डॉ. अभिनव शर्मा के नेतृत्व में अंजाम दी गई।
आराजी संख्या 514 सहित आसपास की जमीन पर कुछ लोगों ने पहले भी निर्माण की कोशिश की थी, जिन्हें मौके पर रोका गया था और स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि यह पेटा भूमि है, जिस पर किसी भी प्रकार का निजी निर्माण गैरकानूनी है। लेकिन प्रशासन की चेतावनियों को नजरअंदाज़ कर, इन्हीं लोगों ने दोबारा निर्माण कार्य शुरू कर दिए — जो साफ तौर पर कानून की खुली अवहेलना और सरकारी संपत्ति पर कब्जे की मानसिकता को दर्शाता है।
प्राधिकरण की टीम ने मौके पर 15 पक्की बाउंड्री वॉल, 2 पक्के कमरे, 2 प्लिंथ लेवल के निर्माण और 5 अस्थायी कोठड़ियों को ध्वस्त किया। साथ ही, मलबा डालकर बनाई गई अवैध सड़क को भी हटाया गया, जो इस बात का सबूत थी कि अतिक्रमणकारियों ने पूरे इलाके को धीरे-धीरे निगलने की साजिश रच रखी थी।
इस कार्रवाई में भरत हथाया, अभय सिंह चुंडावत, विजय नायक, भू-अभिलेख निरीक्षक हितेन्द्र सिंह तंवर, पटवारी व होमगार्ड जवानों ने मोर्चा संभाला और बिना किसी अवरोध के कार्रवाई को अंजाम दिया।
प्रशासन की इस कार्रवाई से यह संदेश साफ है — जो कानून को ठेंगा दिखाएंगे, उनके अवैध निर्माण को जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा। यह न केवल सरकारी भूमि की रक्षा का मामला है, बल्कि सामाजिक नैतिकता और न्याय व्यवस्था की प्रतिष्ठा का प्रश्न भी है।
सरकारी जमीन पर कब्जा करना सिर्फ गैरकानूनी नहीं, बल्कि नैतिक रूप से भी घोर आपत्तिजनक है। समाज को ऐसे लोगों से सचेत रहने की ज़रूरत है जो अपने स्वार्थ के लिए सार्वजनिक संसाधनों को हथियाने में लगे हैं।
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