अनुभवों और विचारों के जरिए लोगों से जुड़ते अनिल सिंघल


जब विचार सच्चे हों और भावनाएं निस्वार्थ, तब जुड़ाव अपने आप बनता है। समाज में पहचान किसी ओहदे या दिखावे से नहीं, बल्कि संवेदनशील सोच और सकारात्मक संदेशों से बनती है। इन्हीं भावनाओं के साथ अनिल सिंघल इन दिनों अपने अनुभवों और विचारों के माध्यम से लोगों से जुड़ते नजर आ रहे हैं, जहां सराहना किसी हैसियत की नहीं, बल्कि सोच और भाव की हो रही है।

अनिल सिंघल भले ही सार्वजनिक जीवन में बीजेपी के लीडर के तौर पर राजनीतिक पहचान रखते हों, लेकिन बीते कुछ समय से लोग उन्हें एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में भी जानने लगे हैं। स्वयं अनिल सिंघल के लिए यह पहचान कोई विशेष महत्व नहीं रखती, उनके लिए असली मायने उन लोगों के हैं, जो इस यात्रा में उनके साथ खड़े हैं, उनका हौसला बढ़ा रहे हैं और उनके शब्दों में विश्वास जता रहे हैं।

इस प्रेरणादायी सफर में उनका परिवार, पार्टी के साथी और शहर के जाने-माने लोग निरंतर उनका उत्साहवर्धन कर रहे हैं। जब शहर के प्रतिष्ठित चेहरे उनके वीडियो देखकर प्रेरणा देते हैं, तो यह हौसला और भी कई गुना बढ़ जाता है। अनिल सिंघल विनम्रता के साथ कहते हैं कि यह स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है, जिसके लिए वे सभी के तहेदिल से आभारी हैं।

भावनाओं का यह सिलसिला उस वक्त और गहरा हो गया, जब उनके अग्रज एवं ‘प्रात:काल’ के संस्थापक संपादक श्री सुरेश गोयल स्वयं उनके घर पहुंचे और परिवार के सामने उनकी हौसला अफजाई की। यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि आत्मीय संवाद से भरी हुई थी। काफी देर तक जीवन, समाज और वीडियो के विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई, साथ ही मार्गदर्शन भी मिला, जिसने अनिल सिंघल को भीतर तक छू लिया।

यहीं नहीं, नारायण सेवा संस्थान के संस्थापक श्री कैलाशजी मानव ने भी ऑडियो-वीडियो संदेश भेजकर उन्हें प्रेरित किया। समाजसेवा और मानवता की मिसाल माने जाने वाले व्यक्तित्व से मिली यह प्रेरणा उनके लिए अविस्मरणीय बन गई।

अनिल सिंघल के वीडियो आमजन से जुड़े विषयों पर आधारित होते हैं। वे जो भी कहते हैं, वह केवल शब्द नहीं होते, बल्कि उनके अपने जीवन के अनुभव होते हैं। इन अनुभवों में गीता जैसे धार्मिक ग्रंथों की शिक्षाएं, संतों और धर्मगुरुओं के प्रवचनों की झलक साफ दिखाई देती है। वे उन भावनाओं को शब्द देते हैं, जिन्हें आम आदमी अपने जीवन में रोज़ महसूस करता है, लेकिन कह नहीं पाता।

उनके विषय उनके आसपास घटने वाली घटनाओं, दोस्तों और परिवार के बीच की बातों से जन्म लेते हैं। कई बार संतों के प्रवचन भी दिशा दिखाते हैं। लेकिन इस पूरी यात्रा में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं वे लोग, जो उनकी बातों को सुनते हैं, समझते हैं और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

अंत में अनिल सिंघल बस इतना ही कहते हैं—
“आप सबका स्नेह और विश्वास ही मेरी असली ताकत है। इसी के लिए दिल से धन्यवाद।”

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