नारायण सेवा संस्थान में देवी भागवत की पूर्णाहुति : 501 दिव्यांग कन्याओं का हुआ महापूजन, सांसद मन्नालाल रावत बोले—निःशुल्क सेवा से संस्थान ने बढ़ाया मेवाड़ का मान

उदयपुर। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर उदयपुर स्थित नारायण सेवा संस्थान के सेवा महातीर्थ ‘वर्ल्ड ऑफ ह्यूमैनिटी’ में सोमवार, 19 अक्टूबर को देवी भागवत कथा की पूर्णाहुति के साथ 501 दिव्यांग कन्याओं का भव्य एवं श्रद्धापूर्ण महापूजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उदयपुर के सांसद डॉ. मन्नालाल रावत शामिल हुए। उन्होंने देवियों के बाल स्वरूप 501 दिव्यांग कन्याओं की आरती उतारी, चरण वंदन कर प्रसाद अर्पित किया और संस्थान में सर्जरी से लाभान्वित बच्चियों से आत्मीय संवाद कर उनके स्वास्थ्य व जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।

‘दिव्यांगों के जीवन में आशा की किरण बना संस्थान’: सांसद डॉ. मन्नालाल रावत
समारोह को संबोधित करते हुए सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांगजनों को ‘दिव्यांग’ नाम देकर समाज में उन्हें नई गरिमा, आत्मसम्मान और पहचान दी है। केंद्र सरकार ने उनके सशक्तीकरण के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं।

उन्होंने संस्थान के योगदान की सराहना करते हुए कहा:

“नारायण सेवा संस्थान निःशुल्क मानव सेवा और देशभर में आयोजित सेवा शिविरों के जरिए पूरे देश में मेवाड़ का मान और गौरव बढ़ा रहा है। शारीरिक रूप से अक्षम और उपेक्षित बच्चों के जीवन में नई आशा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता जगाने का यह प्रयास अत्यंत अनुकरणीय व वंदनीय है।”

समानता, संवेदनशीलता और सेवा का महायज्ञ: प्रशांत अग्रवाल
संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि नारायण सेवा संस्थान वर्षों से दिव्यांग कन्याओं में साक्षात माँ भगवती का रूप देखकर उनका पूजन करता आ रहा है।

सामाजिक स्वीकार्यता का संकल्प: उन्होंने स्पष्ट किया कि नवरात्र पर आयोजित यह महापूजन केवल एक धार्मिक रस्म नहीं है, बल्कि यह समाज को समानता, संवेदनशीलता और नारी सम्मान का संदेश देने वाला सेवा यज्ञ है। इसका मुख्य ध्येय दिव्यांग बालिकाओं और उनके परिजनों को सामाजिक स्वीकार्यता, सुरक्षा और अपनत्व का बोध कराना है।

मुस्कान ही सेवा का प्रतिफल: उन्होंने कहा कि सर्जरी और उपचार के बाद जब इन नन्हीं बच्चियों के चेहरों पर मुस्कान लौटती है, तो वही संस्थान के सेवा संकल्प का वास्तविक प्रतिफल होता है।

इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक पद्मश्री कैलाश ‘मानव’ एवं निदेशक वंदना अग्रवाल भी उपस्थित रहे। निदेशक वंदना अग्रवाल ने सांसद को संस्थान की नियमित गतिविधियों से अवगत कराते हुए बताया कि संस्थान प्रतिदिन बड़ी संख्या में जरूरतमंद दिव्यांगजनों की निःशुल्क सर्जरी, कृत्रिम अंग (आर्टिफिशियल लिंब्स), कैलिपर्स वितरण और व्यावसायिक पुनर्वास के माध्यम से उनके जीवन को संवारने में जुटा है।

कथा के समापन पर पर्यावरण संरक्षण और नारी सम्मान का संदेश
सांयकालीन सत्र में संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल के सानिध्य में देवी भागवत कथा की विधि-विधान से पूर्णाहुति हुई। कथा प्रसंगों में माँ दुर्गा की अनन्य भक्ति, नर-नारायण सेवा, कन्या पूजन, सच्चियाय माता, प्रभु श्रीराम, दानवीर राजा रघु और प्रकृति रक्षक अमृता देवी के जीवन प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को दिव्यांगजनों की निरंतर सहायता, नारी सम्मान, अहिंसा और पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा दी गई। समापन बेला पर उपस्थित जनसमूह ने जरूरतमंदों की सेवा करने और दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उपचार व आत्मनिर्भरता के अवसर दिलाने का संकल्प लिया।

 

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