उदयपुर। भारत और मेक्सिको के बीच सांस्कृतिक संबंधों को एक नई मजबूती देते हुए मेक्सिको की कार्यवाहक राजदूत (चार्ज द’अफ़ेयर्स) क्लौडिया केलर लापेयर ने उदयपुर के ऐतिहासिक सिटी पैलेस का दौरा किया। यहाँ उन्होंने पूर्व राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ से शिष्टाचार भेंट की।
भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र ‘अतिथि देवो भवः’ की गौरवशाली परंपरा को निभाते हुए डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने राजदूत क्लौडिया केलर लापेयर, उनकी बहन गिसेला केलर लापेयर और गनेरीवाल फाउंडेशन के ट्रस्टी कुणाल गनेरीवाल का पारंपरिक मेवाड़ी अंदाज में आत्मीय स्वागत और अभिनंदन किया। इस खास मुलाकात के दौरान डॉ. मेवाड़ ने सभी गणमान्य अतिथियों को स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया।
कला, स्थापत्य और मजबूत सांस्कृतिक संबंधों पर हुआ सार्थक संवाद
सिटी पैलेस के भव्य माहौल में आयोजित इस विशेष मुलाकात के दौरान भारत और मेक्सिको के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक जुड़ाव पर गहराई से चर्चा हुई। डॉ. लक्ष्यराज सिंह और मेक्सिकन राजदूत के बीच मेवाड़ की गौरवशाली विरासत, अनूठी कला, बेजोड़ स्थापत्य (आर्किटेक्चर) तथा ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर बेहद सार्थक और सकारात्मक विचार-विमर्श हुआ।
“हमेशा यादगार रहेगी यह यात्रा” — कार्यवाहक राजदूत क्लौडिया केलर
उदयपुर की खूबसूरती और सत्कार से अभिभूत होकर मेक्सिको की कार्यवाहक राजदूत क्लौडिया केलर लापेयर ने लेक सिटी की जमकर तारीफ की। उन्होंने उदयपुर को दुनिया के सबसे आकर्षक और पसंदीदा पर्यटन स्थलों में से एक बताते हुए कहा:
“राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अद्वितीय कलाकृतियों और आश्चर्यजनक स्थापत्य सौंदर्य से सजे इस भव्य और ऐतिहासिक सिटी पैलेस का भ्रमण करना मेरे लिए अत्यंत सुखद और गौरवपूर्ण अनुभव रहा है। यहाँ की प्रत्येक कलाकृति और विरासत का हर एक हिस्सा राजस्थान की गौरवशाली संस्कृति एवं इतिहास की अनुपम झलक प्रस्तुत करता है। यह यात्रा मेरे दिल में सदैव अविस्मरणीय रहेगी।”
सभ्यताओं को जोड़ने वाला सशक्त सेतु है विरासत
यह शिष्टाचार भेंट विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और साझा मानवीय मूल्यों के माध्यम से दोनों देशों के रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुई है। उदयपुर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में हुई यह मुलाकात एक बार फिर यह साबित करती है कि सांस्कृतिक विरासत केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि अलग-अलग देशों और सभ्यताओं को आपस में जोड़ने वाला एक बेहद मजबूत और खूबसूरत पुल है।
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