
उदयपुर। “नारायण सेवा संस्थान वास्तव में मानवता की सच्ची सेवा का सबसे उत्कृष्ट उदाहरण है। यहाँ पीड़ित और जरूरतमंद समाज के लिए एक ही छत के नीचे जो अद्भुत कार्य हो रहे हैं, वे समूचे राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत हैं।” यह उद्गार राजस्थान हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एवं एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेज के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेके रांका ने व्यक्त किए।
पूर्व जस्टिस रांका ने अपने उदयपुर प्रवास के दौरान नारायण सेवा संस्थान के बड़ी स्थित ‘सेवा महातीर्थ’ परिसर का विस्तृत भ्रमण किया और वहां दिव्यांगजनों के लिए चल रहे सेवा कार्यों को गहराई से देखा।
सेवा महातीर्थ परिसर पहुंचने पर नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने पूर्व न्यायाधीश जेके रांका का आत्मीय स्वागत और अभिनंदन किया। इस दौरान प्रशांत अग्रवाल ने उन्हें संस्थान द्वारा पिछले चार दशकों से अधिक समय से संचालित मानवीय सेवा यात्रा और विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
भ्रमण के दौरान पूर्व जस्टिस रांका ने संस्थान की विश्वस्तरीय चिकित्सा व्यवस्थाओं और सुव्यवस्थित प्रबंधन का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने संस्थान में संचालित निम्नलिखित प्रमुख प्रकल्पों का अवलोकन किया : निःशुल्क ऑपरेशन्स (सर्जरी): दिव्यांगजनों के लिए किए जा रहे अत्यंत जटिल एवं सामान्य ऑपरेशन्स की प्रक्रिया को देखा।
अत्याधुनिक निर्माण इकाई: कृत्रिम अंग और कैलीपर्स निर्माण की आधुनिक तकनीक व कार्यप्रणाली का जायजा लिया।
आत्मनिर्भरता के प्रयास: दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए चलाए जा रहे कौशल विकास प्रशिक्षण, शिक्षा, स्वरोजगार और सामाजिक पुनर्वास के कार्यों की सराहना की।
“यह एक महान और ‘नोबल’ मिशन है”
परिसर में काम करने वाले स्टाफ के निस्वार्थ सेवाभाव और संवेदनशीलता से प्रभावित होकर पूर्व न्यायाधीश जेके रांका ने कहा कि यहाँ आकर उन्हें आंतरिक प्रसन्नता और आत्मिक शांति की अनुभूति हुई है। उन्होंने संस्थान के इस पुनीत अभियान को एक महान और ‘नोबल’ मिशन करार देते हुए ईश्वर से इसके निरंतर प्रगति की कामना की।
उन्होंने अंत में जोड़ते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में मानव सेवा को ही सर्वोच्च धर्म माना गया है और नारायण सेवा संस्थान इसी पावन भावना को पूर्ण समर्पण, संवेदनशीलता और पारदर्शी व्यवस्थाओं के साथ धरातल पर पूरी प्रामाणिकता से साकार कर रहा है।
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