जब न्याय की सीढ़ियां लाचारी से भारी हो गईं : बुजुर्ग महिला का दर्द देख पिघला एसपी डॉ. अमृता दुहन का दिल, बुजुर्गों व दिव्यांगों को नहीं चढ़नी पड़ेंगी सीढ़ियां

उदयपुर।

कहते हैं कि कानून के हाथ लंबे होते हैं, लेकिन जब वही हाथ किसी बेबस और लाचार बुजुर्ग को सहारा देने के लिए आगे बढ़ें, तो खाकी का रंग मानवीयता की सबसे सुंदर मिसाल बन जाता है।

उदयपुर जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय की सीढ़ियों पर रेंगते हुए न्याय की आस में ऊपर चढ़ती एक बुजुर्ग पीड़ित मां का वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो उसने हर संवेदनशील दिल को झकझोर कर रख दिया। पैरों में कमजोरी, आंखों में लाचारी और दिल में न्याय की तड़प लिए उस मां की हर एक सांस जैसे व्यवस्था से सवाल कर रही थी।

इस मार्मिक दृश्य पर उदयपुर की जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने न केवल गहरा संज्ञान लिया, बल्कि उनका दिल भी पसीज गया। उन्होंने तुरंत संवेदनशीलता और मानवीयता की एक ऐसी मिसाल पेश की, जिसने पुलिसिंग के मायने ही बदल दिए। जैसा कि वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है, उदयपुर पुलिस अब समुदाय के हर उस वर्ग के लिए पुलिसिंग को अधिक संवेदनशील, समावेशी और सुलभ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जो समाज में खुद को अकेला पाता हैं।

अब ग्राउंड फ्लोर पर ही सुनी जाएंगी बुजुर्गों और विशेष योग्यजनों की समस्याएं

नियमों में किए गए नए बदलावों के तहत अब एसपी कार्यालय परिसर में आने वाले बुजुर्गों (वरिष्ठ नागरिकों) और विशेष योग्यजनों (दिव्यांगों) को अपनी फरियाद लेकर ऊपरी मंजिलों के चक्कर नहीं काटने होंगे। कार्यालय के ग्राउंड फ्लोर (नीचे) पर ही एक विशेष बैठक क्षेत्र (सिटिंग एरिया) बनाया गया है, जहां वरिष्ठ नागरिक और दिव्यांगजन आराम से बैठ सकते हैं। पीड़ित बुजुर्ग या दिव्यांग व्यक्ति के साथ आया परिवार का कोई भी सदस्य उनकी शिकायत या आवेदन लेकर ऊपर संबंधित अधिकारी या शाखा में जा सकता है।

 

पुलिसकर्मी खुद करेंगे मदद : यदि पीड़ित व्यक्ति के साथ कोई परिजन नहीं है या वह अकेला है, तो ग्राउंड फ्लोर पर तैनात पुलिसकर्मी खुद उनका आवेदन लेकर ऊपर संबंधित अधिकारी तक पहुंचाएंगे और उनकी हर संभव मदद करेंगे।

 

सुगम और बाधारहित वातावरण देने का उद्देश्य

इस मानवीय पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समाज के सबसे कमजोर और सम्मानित वर्ग को न्याय पाने या अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए शारीरिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े। उदयपुर पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के अनुसार, यह व्यवस्था वर्तमान में वैकल्पिक और तात्कालिक रूप से शुरू कर दी गई है, जिसे बेहद जल्द एक स्थाई रूप दे दिया जाएगा ताकि पीड़ितों को एक सुगम, आरामदायक और बाधारहित वातावरण मिल सके। प्रशासन के इस त्वरित और संवेदनशील कदम की आम जनता और सामाजिक संगठनों द्वारा भूरी-भूरी प्रशंसा की जा रही है।

 

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