
उदयपुर। उदयपुर-पिंडवाड़ा हाईवे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक स्थानीय नेता और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के इंस्पेक्टर के बीच बीच सड़क पर हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. इस मामले में जहां बीजेपी नेता पर आरटीओ अधिकारी को गालियां देने और राजकार्य में बाधा डालने का आरोप है, वहीं बीजेपी नेता ने आरटीओ इंस्पेक्टर पर ट्रैक्टर छोड़ने की एवज में ₹80,000 की मोटी रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप जड़ा है.
क्या है वायरल वीडियो का पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उदयपुर-पिंडवाड़ा हाईवे पर एक ट्रैक्टर गुजर रहा था, जिसमें बिजली के पोल के लिए खड्ढे खोदने वाली मशीन लगी हुई थी. हाईवे पर चेकिंग के दौरान आरटीओ इंस्पेक्टर सुनील चौधरी ने इस ट्रैक्टर को गैर-कमर्शियल नंबर पर कमर्शियल गतिविधि करने के संदेह में रोककर जब्त कर लिया. ट्रैक्टर के ड्राइवर शंकर सिंह ने इस कार्रवाई का विरोध किया और तुरंत इसकी सूचना बीजेपी के गोगुंदा मंडल अध्यक्ष निखिल कोठारी को दी.
सूचना मिलते ही बीजेपी नेता निखिल कोठारी मौके पर पहुंचे और ड्राइवर को अपना स्टाफ बताते हुए कहा कि यह ट्रैक्टर उनका है, जिसे उन्होंने ठेके पर दे रखा था. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि बात गाली-गलौज तक पहुंच गई. सामने आए 2 मिनट 56 सेकंड के वीडियो में बीजेपी नेता आरटीओ कर्मचारियों पर चिल्लाते हुए और कई बार अपशब्दों का प्रयोग करते हुए दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने वीडियो में यह भी कहा कि “मुझे पूरा सिस्टम पता है”. दूसरी ओर, आरटीओ कर्मचारियों ने इस पूरे घटनाक्रम का अपने मोबाइल में वीडियो रिकॉर्ड कर लिया.
नेता का आरोप: पहले मांगे ₹1 लाख, फिर ₹80 हजार में सेटलमेंट की बात की
इस पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष रखते हुए बीजेपी नेता निखिल कोठारी ने कहा कि ट्रैक्टर सीज होने के बाद उन्होंने दोपहर में ही आरटीओ ऑफिस जाकर ₹52,200 का कमर्शियल टैक्स भी जमा करवा दिया था. इसके बावजूद आरटीओ अधिकारी पूरे मामले को रफा-दफा करने के लिए पहले ₹1 लाख की मांग कर रहे थे और बाद में ₹80,000 में सेटलमेंट करने की बात पर अड़ गए. उन्होंने गाली-गलौज के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि आरटीओ इंस्पेक्टर जानबूझकर गरीब ड्राइवर को परेशान कर रहे थे, जिसके कारण केवल तीखी बहस हुई थी.
पुलिस और उच्चाधिकारियों का रुख
गोगुंदा थानाधिकारी श्यामसिंह चारण ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि आरटीओ अधिकारी सुनील चौधरी ने थाने पहुंचकर बीजेपी नेता के खिलाफ राजकार्य में बाधा और अभद्रता करने का एक लिखित परिवाद (शिकायत) दिया है. पुलिस वायरल वीडियो और मौके पर मौजूद चश्मदीदों के बयानों के आधार पर मामले की गहनता से जांच कर रही है. इस संवेदनशील मामले पर जब जिले के उच्चाधिकारियों— आरटीओ ज्ञानदेव विश्वकर्मा और डीटीओ मुकेश डाढ़ से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया.
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