
उदयपुर। राजस्थान की सियासत में ‘उदयपुर फाइल्स’ के जिन्न ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की रातों की नींद उड़ा दी है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सीधे सत्ता के गलियारों पर हमला बोलते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जूली ने दहाड़ते हुए सवाल किया कि आखिर पुलिस किस ‘बड़े’ भाजपा नेता को बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है?
‘उदयपुर फाइल्स’ का काला सच : पुलिस की नीयत पर सवाल
टीकाराम जूली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस की चार्जशीट के चिथड़े उड़ाते हुए कहा कि जब कोर्ट में यह साफ हो गया है कि वीडियो AI (Artificial Intelligence) से निर्मित नहीं है, तो फिर उस रसूखदार नेता का नाम उजागर करने में पुलिस के हाथ-पांव क्यों फूल रहे हैं?
“भाजपा दिल्ली में महिला सुरक्षा का ढोंग करती है, लेकिन यहां उदयपुर में उनकी अपनी महिला पदाधिकारी सुरक्षित नहीं हैं। आखिर वह कौन भाजपा नेता है जिसे बचाने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी ढाल बनी बैठी है?” — टीकाराम जूली
आधी रात का ‘ऑपरेशन’ और बदलती जांच
जूली ने पुलिस और भाजपा के गठजोड़ पर हमला करते हुए सनसनीखेज आरोप लगाया कि आरोपियों को पकड़ने के लिए भाजपा नेता पुलिस के साथ दरवाजे तोड़ते नजर आए। उन्होंने पूछा कि आखिर किसके इशारे पर रातों-रात जांच की दिशा बदल दी गई? जयपुर को अंधेरे में रखकर दिल्ली से स्क्रिप्ट लिखी जा रही है।
बदहाल शिक्षा और ‘अजीब’ मंत्री: सरकार पर चौतरफा वार
शिक्षा विभाग की दुर्दशा पर तंज कसते हुए जूली ने शिक्षा मंत्री को ‘अजीब’ करार दिया। उन्होंने कहा:
नाम बदलने का जुनून: सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ नाम बदलने पर है, जबकि डेढ़ लाख पद खाली पड़े हैं।
बच्चों के हक पर डाका: बच्चों को न साइकिल मिल रही है, न ड्रेस और न ही स्कूटी।
जर्जर स्कूल: झालावाड़ हादसे के बाद भी जर्जर स्कूलों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
चुनाव से डरती ‘पर्ची सरकार’
जूली ने साफ कहा कि भाजपा हार के डर से निकाय और पंचायत चुनाव टाल रही है। उन्हें डर है कि हार मिली तो मुख्यमंत्री की कुर्सी छिन जाएगी। रिफाइनरी से लेकर अस्पतालों तक लग रही आग की घटनाओं पर जूली ने तंज कसा कि जब से यह सरकार आई है, प्रदेश में हर जगह सिर्फ ‘आग’ ही लग रही है और जांच का कहीं अता-पता नहीं है।
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