
उदयपुर। सेवा और समर्पण की नगरी उदयपुर में उस वक्त एक अनूठा संगम देखने को मिला, जब कनाडा से आए एक अप्रवासी भारतीय परिवार ने अपनी जड़ों की याद में वृद्धजनों के जीवन में खुशियों का उजाला किया। सेक्टर-14 स्थित तारा संस्थान के ‘माँ द्रौपदी देवी आनंद वृद्धाश्रम’ में आयोजित समारोह में कनाडा निवासी मोहिंदर सिंह सामरा और उनके परिवार ने वृद्धाश्रम की तीसरी मंजिल का भव्य लोकार्पण किया।
माता-पिता की स्मृति में ‘सेवा का संकल्प’
श्री मोहिंदर सिंह सामरा ने इस नवनिर्मित मंजिल को अपने स्वर्गीय माता-पिता, श्री नरंजन सिंह सामरा एवं श्रीमती हुकुम कौर सामरा की पवित्र स्मृति को समर्पित किया। लोकार्पण के अवसर पर सामरा परिवार ने बुजुर्गों के बीच समय बिताया और संस्थान की कृष्णा शर्मा के साथ आश्रम का भ्रमण कर यहाँ दी जा रही सुविधाओं की सराहना की।
सांस्कृतिक रंग: जब बुजुर्गों ने ‘रैंप’ पर बिखेरा जलवा
कार्यक्रम केवल लोकार्पण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यहाँ खुशियों का उत्सव मनाया गया:
नन्हे कदम : शिखर भार्गव स्कूल के बच्चों ने पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में लोकगीतों पर मनमोहक नृत्य कर मेहमानों का मन मोह लिया।
बुजुर्गों का फैशन शो : आश्रम के वृद्धजनों ने भारत के महान नेताओं, खिलाड़ियों और वैज्ञानिकों की वेशभूषा धारण कर एक खास ‘फैशन शो’ प्रस्तुत किया। उनकी जीवटता और उत्साह देखकर हर कोई दंग रह गया।
विदेशी मेहमानों का ‘घूमर’ : राजस्थानी संस्कृति के जादू से कनाडा का सामरा परिवार भी नहीं बच सका। मेहमानों ने न केवल राजस्थानी पहनावा धारण किया, बल्कि ‘घूमर’ के स्टेप्स सीखकर जमकर आनंद लिया।
प्रेरणादायक संदेश : 15 साल के पोते ने लिया संकल्प
समारोह के दौरान सामरा परिवार के सदस्यों के विचार बेहद प्रेरणादायी रहे:
परमिंदर कौर सामरा ने भावुक होकर कहा कि यहाँ आकर उन्हें अपनों जैसा सुख मिला है और वे अब हर साल यहाँ आना चाहती हैं।
विक्रमजीत जी ने संस्थान के समर्पण की प्रशंसा की। सबसे विशेष क्षण वह था जब उन्होंने बताया कि उनके 15 वर्षीय पुत्र ने आश्रम की व्यवस्थाओं और सेवा को देखकर यह संकल्प लिया है कि वह भविष्य में अपनी पहली कमाई यहीं दान करेगा।
कार्यक्रम के समापन पर संस्था प्रमुख कल्पना गोयल एवं दीपेश मित्तल ने सामरा परिवार का आभार जताते हुए कहा कि प्रवासी भारतीयों का अपनी मिट्टी और बुजुर्गों के प्रति यह लगाव अन्य लोगों के लिए एक मिसाल है।
मानवता की कोई सीमा नहीं
उदयपुर के इस वृद्धाश्रम में हुआ यह आयोजन साबित करता है कि दूर देशों में बसने के बावजूद भारतीय संस्कार और बुजुर्गों के प्रति आदर का भाव आज भी सामरा परिवार जैसे लोगों के दिलों में जीवित है।
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