नई दिल्ली। रिटायरमेंट प्लानिंग का मतलब केवल बैंक में पैसे जमा करना नहीं, बल्कि एक ऐसा मजबूत फंड तैयार करना है जो सक्रिय आय बंद होने के बाद भी हर महीने नियमित और सुरक्षित रिटर्न देता रहे। बढ़ती महंगाई दर और बढ़ती जीवन प्रत्याशा के दौर में वित्तीय विशेषज्ञ समय रहते निवेश शुरू करने पर जोर दे रहे हैं। म्यूचुअल फंड का सिस्टमेटिक विदड्रॉल प्लान (SWP) सेवानिवृत्ति के बाद नियमित मासिक आय के लिए एक प्रभावी जरिया बनकर उभरा है, जिसके जरिए मूल पूंजी को सुरक्षित रखते हुए नियमित निकासी की जा सकती है।
300 गुना फंड का बुनियादी नियम और पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन
वित्तीय जानकारों के मुताबिक, रिटायरमेंट कॉर्पस का आकलन करते समय जीवनशैली, भविष्य के मेडिकल खर्च और महंगाई का ध्यान रखना अनिवार्य है। एक सामान्य वित्तीय नियम के अनुसार, व्यक्ति के पास अपने मौजूदा मासिक खर्च का कम से कम 300 गुना फंड होना चाहिए। जोखिम और उम्र के तालमेल के लिए इक्विटी, पीपीएफ (PPF), ईपीएफ (EPF), एनपीएस (NPS) और बॉन्ड्स का संतुलित पोर्टफोलियो बनाना समझदारी माना जाता है, ताकि आपातकालीन जरूरतों के लिए मुख्य रिटायरमेंट फंड को न छूना पड़े।
₹50,000 मासिक आय के लिए उम्रवार निवेश का गणित
यदि 60 वर्ष की आयु में रिटायरमेंट और 85 वर्ष की जीवन प्रत्याशा मानी जाए (महंगाई दर 6% और निवेश पर 12% औसत रिटर्न के आधार पर), तो ₹50,000 मासिक आय पाने के लिए अलग-अलग उम्र में आवश्यक मासिक निवेश का ब्योरा इस प्रकार है:
20 वर्ष की उम्र से शुरुआत: हर महीने ₹13,114 का निवेश करना होगा, जिससे 60 वर्ष की उम्र तक लगभग ₹15.42 करोड़ का फंड तैयार होगा।
25 वर्ष की उम्र से शुरुआत: मासिक निवेश ₹17,928 रहेगा, जिससे करीब ₹11.52 करोड़ का कॉर्पस बनेगा।
30 वर्ष की उम्र से शुरुआत: हर महीने लगभग ₹24,650 का निवेश करना होगा, जिससे ₹8.61 करोड़ का फंड जमा होगा।
35 वर्ष की उम्र से शुरुआत: मासिक निवेश बढ़कर ₹34,265 हो जाएगा, जिससे करीब ₹6.43 करोड़ का कॉर्पस तैयार होगा।
40 वर्ष की उम्र से शुरुआत: हर महीने ₹48,630 का निवेश आवश्यक होगा, जिससे लगभग ₹4.81 करोड़ का फंड बन सकेगा।
(नोट: यह गणना इस आधार पर है कि रिटायरमेंट के बाद भी बचे हुए फंड पर न्यूनतम 6 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न मिलता रहेगा।)
कंपाउंडिंग की ताकत: जितनी जल्दी शुरुआत, उतना कम दबाव
वित्तीय विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि रिटायरमेंट प्लानिंग में ‘समय’ सबसे बड़ा कारक है। 20 की उम्र में निवेश शुरू करने पर जो लक्ष्य ₹13,000 मासिक से हासिल हो जाता है, 40 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उसी लक्ष्य के लिए प्रतिमाह ₹48,000 से अधिक लगाने पड़ते हैं। चक्रवृद्धि (कंपाउंडिंग) का अधिकतम लाभ उठाने के लिए करियर की शुरुआत से ही नियमित निवेश सबसे कारगर रणनीति है।
About Author
You may also like
झीलों की नगरी में फिर सजा ‘पर्यटन सुरक्षा’ का तमाशा : फीते कटने से नहीं, जवाबदेही तय होने से सुरक्षित होते हैं सैलानी
उदयपुर की रामलीला : इमोशन, ड्रामा और हाई-ऑक्टेन एक्शन का परफेक्ट ब्लेंड, जटायु के बलिदान ने खींचे दर्शकों के आंसू
तकनीक जब इंसान की सहूलियत बने: हिंदुस्तान जिंक और उबर का यह साझा कदम भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए एक नजीर
मेवाड़ की माटी में सत्ता की चौसर: जब पंचायत के अखाड़े में दांव पर लग जाए दिग्गजों की चौधराहट
उदयपुर में रामलीला का मंचन (तीसरा दिन) : जब पत्थर में जान फूंक दी गई और निम्बार्क मैदान में छलक उठीं आंखें
