‘खाटू वाले’ के दर्शन से पहले ही उजड़ गए हंसते-खेलते परिवार : कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के पुल से गिरी बस, 8 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत, पल भर में मातम में बदली खुशियां

कोटा: जिंदगी कितनी बेरहम और बेबस हो सकती है, इसका रूह कंपा देने वाला मंजर शनिवार की सुबह राजस्थान के कोटा में देखने को मिला। घर से चेहरे पर मुस्कान, दिल में अटूट आस्था और जुबां पर ‘हारे के सहारे’ खाटू श्याम बाबा के जयकारे लिए निकले श्रद्धालुओं को क्या मालूम था कि रास्ते में ही मौत उनका इंतजार कर रही है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सीकर के खाटू धाम जा रही श्रद्धालुओं से भरी मिनी बस शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर कोटा के सिमलिया थाना इलाके में अनियंत्रित होकर पुल से नीचे नाले में जा गिरी। 15 फीट की ऊंचाई से गिरे उस वाहन के परखच्चे उड़ने के साथ ही आठ परिवारों की दुनिया हमेशा-हमेशा के लिए उजड़ गई।

एक झपकी और… चीखों में तब्दील हो गए बाबा के भजन

वे सभी अलग-अलग परिवारों के थे, लेकिन पड़ोसियों और पुराने परिचितों की तरह एक डोर में बंधे थे। कई दिनों से इस धार्मिक यात्रा की तैयारी चल रही थी। रात भर सफर में बाबा के भजनों की गूंज थी और मंशा थी कि सूरज चढ़ते-चढ़ते बाबा श्याम के चौखट पर माथा टेकेंगे। लेकिन रात भर गाड़ी चलाने के बाद सुबह के धुंधलके में चालक को आई एक पल की झपकी ने सब कुछ खत्म कर दिया। एक्सप्रेसवे पर अचानक अनियंत्रित हुई बस पुल की रेलिंग से टकराई और सीधे 15 फीट नीचे कीचड़ और पानी से भरे नाले में जा समाई।

जिस सफर में कुछ देर पहले तक अपनेपन की बातें और हंसी-ठिठोली थी, वहां पलक झपकते ही सिर्फ खून, टूटी खिड़कियां और अपनों को बचाने की बेबस चीखें रह गईं।

नाले के दलदल में जिंदगी की जद्दोजहद: क्रेन से निकालने पड़े घायल

हादसे की भयावहता ऐसी थी कि जिसने भी देखा, उसका कलेजा मुंह को आ गया। नाले में भरे पानी और दलदल के बीच फंसे घायल जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे थे। राहगीरों और पुलिस की सांसें तब थम गईं जब मलबे के बीच से कराहते हुए लोगों और मासूमों की आवाजें आ रही थीं। आनन-फानन में क्रेन मंगवाकर क्षतिग्रस्त बस को हटाया गया और घायलों को बाहर निकाला गया।

कोटा ग्रामीण के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामकल्याण मीणा के मुताबिक, इस हादसे में 8 लोगों की मौके और अस्पताल पहुंचने के दौरान सांसें थम गईं, जबकि 15 से ज्यादा लोग बुरी तरह जख्मी हैं। जिस शख्स ने सबको जोड़कर इस यात्रा का ताना-बाना बुना था, वह भी अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की जंग लड़ रहा है—शायद उसे अभी यह भी नहीं मालूम कि उसके साथ चलने वाले कितने साथी अब कभी वापस नहीं लौटेंगे।

अस्पतालों में सिसकियां, कलेक्टर बोले—गंभीर घायलों को आईसीयू में रखा गया

हादसे की खबर मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया। जिला कलेक्टर पीयूष समारिया खुद मॉनिटरिंग में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि कई घायलों की हालत नाजुक है, जिन्हें मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती कर डॉक्टरों की विशेष टीम निगरानी कर रही है।

अस्पताल के गलियारों में इस वक्त जो सन्नाटा और सिसकियां हैं, वे किसी भी पत्थर दिल को पिघला देने के लिए काफी हैं। कोई अपने पिता को ढूंढ रहा है, तो कोई अपने जीवनसाथी की आखिरी सांसों के लिए दुआएं मांग रहा है। आस्था के सफर का ऐसा खूनी और दर्दनाक अंत पूरे इलाके की आंखों में आंसू छोड़ गया है।

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