
फोटो : कमल कुमावत
उदयपुर। लगातार हो रही बारिश के बीच सोमवार को उदयपुर के कलेक्ट्रेट पर भारतीय ट्राइबल पार्टी (बाप) के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने पुलिस के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी— गिर्वा डीएसपी सूर्यवीर सिंह को हटाया जाए और सायरा क्षेत्र में हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
बारिश में भीगते हुए प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि डीएसपी सूर्यवीर सिंह ने सायरा में एक सड़क हादसे के बाद आक्रोश जताने पहुंचे ग्रामीणों के साथ दुर्व्यवहार, जातिगत अपशब्द और मारपीट की थी। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने उदयपुर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

23 अक्टूबर को उदयपुर जिले की कटार ग्राम पंचायत के पास बरवाड़ा हाईवे पर एक सड़क हादसा हुआ था। हादसे में अंबालाल गमेती (28) नामक युवक की मौत हो गई थी। वह गुरुवार दोपहर मजदूरी के लिए जा रहा था, तभी पीछे से आ रही एक कार ने उसकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे के बाद कार चालक मौके से फरार हो गया, लेकिन बाद में पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।
घटना के बाद मृतक के परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए। उन्होंने हाईवे पर जाम लगा दिया और मुआवजे की मांग करते हुए पुलिस प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि पुलिस को भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में 29 लोगों को गिरफ्तार किया और 52 वाहनों को जब्त किया।
ग्रामीणों और बाप कार्यकर्ताओं का आरोप
प्रदर्शन कर रहे बाप कार्यकर्ताओं का कहना है कि पुलिस ने पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की, जबकि ग्रामीण केवल न्याय और मुआवजे की मांग कर रहे थे।
बाप नेता कांतिलाल रोत ने कहा,
“यह पूरा मामला एक साधारण सड़क हादसे के बाद उत्पन्न आक्रोश का था। लेकिन पुलिस ने इसे राजनीतिक रूप देने की कोशिश की और निर्दोष युवाओं को फंसाया। डीएसपी सूर्यवीर सिंह ने प्रदर्शनकारियों से बदसलूकी की और जातिगत टिप्पणियां तक कीं।”
कांतिलाल ने यह भी कहा कि अगर पुलिस और प्रशासन ने समय पर संवेदनशीलता दिखाई होती, तो हालात नहीं बिगड़ते।
उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई और फर्जी गिरफ्तार युवाओं की रिहाई की मांग की।
बारिश में भी डटे रहे प्रदर्शनकारी
सोमवार सुबह से ही उदयपुर में लगातार बारिश हो रही थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों का जोश कम नहीं हुआ। कलेक्ट्रेट परिसर में जुटे ग्रामीणों ने छाते और बरसाती में भी नारेबाजी जारी रखी। कई महिलाएं भी इस प्रदर्शन में शामिल हुईं।
पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर अतिरिक्त बल तैनात किया, ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।
प्रदर्शन के दौरान प्रशासन की ओर से प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड अधिकारी (SDM) को ज्ञापन सौंपा और डीएसपी सूर्यवीर सिंह को तत्काल हटाने की मांग की।
पुलिस का पक्ष
उदयपुर पुलिस का कहना है कि सायरा पथराव कांड में जो कार्रवाई की गई, वह कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक थी।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक,
“ग्रामीणों ने रोड जाम कर रखा था और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया था। हालात बिगड़ने पर पुलिस को आंसू गैस छोड़नी पड़ी। किसी के साथ जातिगत व्यवहार या मारपीट के आरोप बेबुनियाद हैं। जांच में अगर कुछ भी सामने आता है, तो कार्रवाई की जाएगी।”
मामले की जांच और राजनीतिक असर
बाप पार्टी ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
स्थानीय स्तर पर यह मामला आदिवासी समुदाय की नाराज़गी का प्रतीक बन गया है।
कई ग्रामीण संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
ग्रामीणों की मांगें
गिर्वा डीएसपी सूर्यवीर सिंह को पद से हटाया जाए। सड़क हादसे के मृतक अंबालाल गमेती के परिजनों को नियम अनुसार मुआवजा दिया जाए। गिरफ्तार किए गए निर्दोष युवाओं को तुरंत रिहा किया जाए। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए।
उदयपुर प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से वार्ता के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। मामले पर उच्चाधिकारियों की निगरानी जारी है। हालांकि, बाप कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई जल्द नहीं हुई तो वे उदयपुर से जयपुर तक रैली निकालेंगे और राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।
सायरा हादसे से उपजा विवाद अब प्रशासन और आदिवासी समाज के बीच अविश्वास का प्रतीक बन गया है। बारिश में भी प्रदर्शनकारियों का सड़कों पर डटे रहना यह दिखाता है कि ग्रामीण न्याय की उम्मीद लेकर खड़े हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पूरे विवाद को संवाद और संवेदनशीलता से सुलझाता है या मामला और गहराता है।
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