फोटो : कमल कुमावत

उदयपुर। उदयपुर नगर निगम चुनाव के तहत वार्ड क्रमांक 45 में इन दिनों जो चुनावी परिदृश्य उभर रहा है, वह स्थानीय निकाय की राजनीति में मजबूत और अनुभवी नेतृत्व की प्रासंगिकता को रेखांकित करता है। राज्य के जनजाति मंत्री बाबूलाल खराड़ी की मौजूदगी में भाजपा प्रत्याशी दिनेश भट्ट के समर्थन में निकला विशाल रोड शो केवल चुनावी औपचारिकता नहीं, बल्कि क्षेत्र में उनके गहरे प्रभाव और जनता के साथ सीधे जुड़ाव का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। सड़कों पर उमड़ी भीड़ और कार्यकर्ताओं का उत्साह यह बताता है कि मुकाबला अब केवल सामान्य प्रचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो लोकतंत्र में मतदाताओं की पहली प्राथमिकता यह होती है कि उनका प्रतिनिधि ऐसा हो जिसकी प्रशासनिक समझ पुख्ता हो और जिसकी आवाज निगम के नीति-नियंताओं तक सीधे पहुंचे। दिनेश भट्ट का नाम शहर की राजनीति में किसी परिचय का मोहताज नहीं है; उन्हें न केवल वार्ड के एक सक्षम प्रतिनिधि के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि शहर के भावी नेतृत्व यानी महापौर (मेयर) पद के सबसे स्वाभाविक और गंभीर दावेदारों में भी गिना जा रहा है। जब कोई ऐसा नेता मैदान में होता है जिसकी पहुंच संगठन और सरकार के शीर्ष स्तर तक हो, तो क्षेत्र के नागरिकों को यह भरोसा स्वाभाविक रूप से मिलता है कि उनके वार्ड की फाइलों को नगर निगम के दफ्तरों में धूल नहीं फांकनी पड़ेगी।

मुकाबले की दूसरी ओर कांग्रेस ने पंकज सुखवाल को उतारा है, जबकि कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय मैदान में उतरीं तारा चौधरी ने विपक्षी खेमे के मतों में साफ बिखराव की स्थिति पैदा कर दी है। विपक्ष की यह अंदरूनी खींचतान और विभाजित जनाधार सीधे तौर पर दिनेश भट्ट की संगठनात्मक पकड़ और उनकी स्थिर स्थिति को और अधिक मजबूत करता दिख रहा है।

मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने अपने संबोधन में जिन विकास योजनाओं और समस्याओं के त्वरित समाधान का भरोसा दिलाया, उसके पीछे दिनेश भट्ट का वह पुराना राजनीतिक कद है जो शहर के नीतिगत फैसलों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। वार्ड 45 की सड़कें, सुदृढ़ जल आपूर्ति, ड्रेनेज और स्वच्छता जैसे बुनियादी मसलों को यदि किसी मजबूत और विजनरी चेहरे का साथ मिले, तो विकास की रफ्तार तेज होना लाजिमी है। अब देखना यह होगा कि वार्ड 45 की प्रबुद्ध जनता बिखरे हुए विकल्पों के बजाय एक प्रभावी और नेतृत्व क्षमता से संपन्न प्रतिनिधि को चुनकर अपने वार्ड के विकास का मार्ग कितना प्रशस्त करती है।





About Author
You may also like
जब रक्षक पर उठे सवाल तो कानून के पहरुओं ने खोला मोर्चा : सवीना थाने में गूंजा वकीलों का आक्रोश, सीआई को हटाने की मांग पर तीन घंटे चला संग्राम
रील लाइफ से रियल लाइफ तक : जब टाइगर श्रॉफ की मां आयशा ने संभाली घायल ब्लॉगर के इलाज की जिम्मेदारी
हिंदुस्तान जिंक की सखी माइक्रोएंटरप्राइज परियोजना : जब हुनर से गढ़ा जाता है नारी का स्वाभिमान
उज्जैन में प्रकृति चिंतन का नया शंखनाद : विकसित भारत के लिए पर्यावरण और विकास का संतुलन जरूरी
उदयपुर में भाजपाई वर्चस्व की उठापटक : चौराहे के फीते पर सत्ता का अहंकार और मर्यादा का चीरहरण
