
संघर्ष, संवेदना और सपनों के संगम से भावुक हुआ सेवा महातीर्थ का वातावरण
उदयपुर। जब जीवन की राहों में संघर्ष की धूप तेज होती है, तब उम्मीद की एक किरण ही मन को नई ताकत देती है। ऐसी ही उम्मीदों, संवेदनाओं और मानवता की मधुर छाया में शनिवार को नारायण सेवा संस्थान के सेवा महातीर्थ, लियों का गुड़ा परिसर में 45वें नि:शुल्क दिव्यांग एवं निर्धन युवक-युवतियों के सामूहिक विवाह समारोह का भावुक और उल्लासपूर्ण शुभारंभ हुआ।

इस मानवीय उत्सव में 51 जोड़े जीवन की नई डगर पर कदम रखने जा रहे हैं, जिनमें 25 दिव्यांग और 26 सकलांग जोड़े शामिल हैं। देश के अलग-अलग राज्यों से आए 700 से अधिक मेहमान इस अद्भुत पल के साक्षी बन रहे हैं, जहां हर मुस्कान के पीछे संघर्ष की कहानी और हर आंख में नए जीवन के सपनों की चमक दिखाई दे रही है।
समारोह की शुरुआत प्रातः शुभ मुहूर्त में गणपति स्थापना और “घर में पधारो गजानंद जी” की मंगलध्वनि के साथ हुई। जैसे ही गणपति वंदन के सुर गूंजे, पूरे परिसर में श्रद्धा, आस्था और खुशियों का अनूठा संगम दिखाई देने लगा। इसके बाद हल्दी और मेहंदी की पारंपरिक रस्मों ने वातावरण को और अधिक मंगलमय बना दिया।

प्रातः 11:15 बजे सभी 51 जोड़े पीले परिधान में सजे-धजे, पीले फूलों से सुसज्जित हाड़ा सभागार के मंच पर अपने-अपने स्थानों पर विराजमान हुए। मानो पूरा परिसर पीले रंग की आभा में आशाओं और खुशियों का उत्सव बन गया हो।
संस्थान के संस्थापक-चेयरमैन पद्मश्री कैलाश ‘मानव’, सहसंस्थापिका कमला देवी, अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल और पलक अग्रवाल ने विशिष्ट अतिथियों के साथ गणपति स्थापना कर विवाह समारोह का विधिवत शुभारंभ किया।

निदेशक वंदना अग्रवाल और पलक अग्रवाल के निर्देशन में अतिथियों ने जोड़ों को हल्दी और मेहंदी लगाने की रस्म निभाई। इस दौरान “आए है मेरी जिंदगी में बहार…”, “हल्दी लगाओ तेल चढ़ाओ री…”, “म्हारी मेहंदी को रंग…”, और “श्याम नाम की मेहंदी…” जैसे गीतों की मधुर धुनों पर मेहमानों ने भी उत्साह के साथ ठुमके लगाए। पूरा माहौल खुशियों, अपनत्व और उत्सव की ऊर्जा से सराबोर हो उठा।
समारोह में मुख्य अतिथि विजया कुमारी (दिल्ली), त्रिशाल शर्मा (साउथ अफ्रीका), महिराज (मॉरीशस) और प्रसन्न कुमार राउत (उड़ीसा) सहित सेवा मनीषियों का पद्मश्री कैलाश ‘मानव’, प्रशांत अग्रवाल, जगदीश आर्य और देवेंद्र चौबीसा ने पगड़ी-उपरना और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया।

पहले दिन की शाम महिला संगीत और नृत्य संध्या के नाम रही। वैवाहिक गीतों की मधुर लहरियों के बीच प्रस्तुत राधा-कृष्ण रास नृत्य, रुद्रावतार हनुमान, दुर्गा के नव स्वरूप और अयोध्यापति श्रीराम पर आधारित नृत्य-नाटिकाओं ने उपस्थित जनों को भावविभोर कर दिया। कई क्षण ऐसे आए जब दर्शकों की आंखें भी भावनाओं से नम हो उठीं।
संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि रविवार को प्रातः 11:15 बजे सभी जोड़े वैदिक मंत्रों की पावन गूंज के बीच पवित्र अग्नि के सात फेरे लेकर अपने दांपत्य जीवन की नई यात्रा शुरू करेंगे। संस्थान की ओर से प्रत्येक जोड़े को गृहस्थ जीवन के लिए आवश्यक सामग्री भी उपहार स्वरूप प्रदान की जाएगी।
हर जोड़ा एक कहानी, हर कहानी एक प्रेरणा
इस सामूहिक विवाह की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां बैठा हर जोड़ा अपने साथ जीवन के संघर्षों की एक अनोखी कहानी लेकर आया है। किसी ने शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा, तो किसी ने आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों के बीच भी अपने सपनों को जिंदा रखा।

आज ये जोड़े केवल विवाह की रस्में नहीं निभा रहे, बल्कि समाज को यह संदेश दे रहे हैं कि जीवन की असली ताकत शरीर की सीमाओं में नहीं, बल्कि इंसान के हौसले और विश्वास में होती है।
यही कारण है कि यह सामूहिक विवाह समारोह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मानवता, संवेदना और नए जीवन की शुरुआत का ऐसा उत्सव बन जाता है, जहां हर मुस्कान के पीछे उम्मीद का उजाला और हर कदम में भविष्य की नई राह दिखाई देती है।
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