
उदयपुर। विद्या भारती जनजाति समिति राजस्थान द्वारा आयोजित पूर्ण कालिक कार्यकर्ताओं के व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षण शिविर के चौथे दिन विभिन्न विषयों पर बौद्धिक सत्र आयोजित किए गए। इस सत्र का उद्घाटन डॉ. राकेश डामोर, मंत्री और नारायण गमेती, सचिव, विद्या भारती जनजाति समिति राजस्थान द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
डॉ. राकेश डामोर ने जनजाति समाज की संस्कृति की वैज्ञानिक विशेषताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति में कई प्रथाएं विज्ञान पर आधारित हैं, जैसे रात में पेड़-पौधों की पत्तियां नहीं तोड़ना, पीपल और नीम के पेड़ों के नीचे सोना, पारंपरिक वाद्य यंत्रों का उपयोग, और विशेष वेशभूषा।

इसके बाद चर्चा सत्र में उदयपुर संसदीय क्षेत्र के सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने जनजाति समाज में फैले विभिन्न भ्रमों पर बात की। उन्होंने आदिवासी समाज को हिन्दू धर्म का हिस्सा न मानने, प्रकृति पूजक होने, आरक्षण समाप्ति, पांचवीं अनुसूची, अलगाववाद, ग्राम सभा की सर्वोच्चता, अर्बन नक्सलवाद, और डीलिस्टिंग जैसे मुद्दों पर संवैधानिक और कानूनी दृष्टिकोण से कार्यकर्ताओं को समाधान प्रदान किया।
इस कार्यक्रम का संचालन दिनेश डामोर ने किया और आभार डॉ. राकेश डामोर ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में स्वागत विभाग और जिला प्रवासी द्वारा भी विशेष योगदान दिया गया।
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