फोटो एंड वीडियो : कमल कुमावत
उदयपुर। हास्य जब सिर्फ चुटकुला न रहकर व्यवस्था के बंद कमरों में दबी सच्चाइयों पर रोशनी डालने लगे, तो महफिल की हंसी के पीछे एक गहरा सन्नाटा भी तैर जाता है। रविवार की रात नगर निगम के टाउनहॉल में कुछ ऐसा ही मंजर था। मौका था विश्वप्रसिद्ध दीपावली मेले के पांचवें दिन सजी हास्य संध्या का, जहाँ स्टैंडअप कॉमेडियन गौरव गुप्ता ने जब माइक संभाला, तो सिर्फ रोजमर्रा के किस्से नहीं सुनाए, बल्कि मंच के ठीक सामने अगली कतारों में बैठे नगर निगम के कर्ता-धर्ताओं की दुखती रग पर बड़ी नजाकत से हाथ रख दिया।
दीपावली की सतरंगी रोशनी और झूलों के शोर के बीच टाउनहॉल का पांडाल खचाखच भरा था, लेकिन माहौल में असली सिहरन तब दौड़ी जब गौरव गुप्ता ने दर्शकों से सीधा संवाद छेड़ते हुए निगम की ‘भीतरी कार्यप्रणाली’ को अपने व्यंग्य के घेरे में ले लिया।
जब पार्षदों के सामने उछला ‘कमीशन’ का सिक्का
गौरव गुप्ता की कॉमिक टाइमिंग जितनी तेज थी, उनके तीर उतने ही सटीक थे। दर्शकों की पहली कतार में बैठे पार्षदों और जन प्रतिनिधियों की ओर रुख करते हुए जब उन्होंने नगर निगम में चलने वाले ‘कमीशन’ के गणित पर चुटीला कटाक्ष किया, तो पूरा पांडाल ठहाकों और सीटियों से गूंज उठा।
यह वह हंसी थी, जिसमें आम शहरवासी का बरसों का दबा दर्द भी था और व्यवस्था का आईना भी। गौरव ने बड़े मासूमियत भरे अंदाज में पार्षदों से संवाद करते हुए जब यह चुटकी ली कि फाइलों की गति और काम की मंजूरी के पीछे कौन सा ‘अदृश्य ईंधन’ काम करता है, तो मंच पर बैठे कई सफेदपोश चेहरे अपनी मुस्कुराहटों में असहजता छुपाते नजर आए। जनता को सबसे ज्यादा लुत्फ इसी बात का आया कि जो बात शहर के चौराहों पर दबी जुबान में कही जाती है, वह मंच से सीधे उन चेहरों के सामने बयां हो रही थी जो उस व्यवस्था के पहिए हैं।
व्यवसायी एवं पार्षद यशवंत आंचलिया के साथ गौरव की नोकझोंक ने महफिल का रंग और गहरा कर दिया। आंचलिया के कारोबार और राजनीतिक मिजाज को लेकर उन्होंने ऐसी फिरकी ली कि खुद आंचलिया भी अपनी हंसी नहीं रोक सके। इसके बाद व्यंग्य का यह कारवां अतुल चंडालिया और स्वयं महापौर पारस सिंघवी तक भी पहुंचा। महापौर के सामने जब शहर की व्यवस्था और सियासत के पेंच कसे गए, तो दर्शक दीर्घा से तालियों की गड़गड़ाहट देर तक थमी नहीं।
जैन, महाजन और पंजाबी समाज की रवायतों पर चुटीला अंदाज
अपने ट्रेडमार्क बनिए-पंजाबी मिजाज को भुनाते हुए गौरव गुप्ता ने जैन, महाजन और पंजाबी समाज के कारोबारी संस्कारों, बचत की कला और सामाजिक अहमियत को जिस तरह हास्य के सांचे में ढाला, उसने लेकसिटी के व्यापारिक वर्ग को सीधे कनेक्ट किया। सौदेबाजी के फन से लेकर शादियों के तामझाम तक—गौरव ने दिखावे के पीछे छुपी मानवीय कमजोरियों को बड़े सलीके से उधेड़ा।
कमलेश दवे और असीम शुक्ला ने घोली हास्य की चाशनी
गौरव गुप्ता के मंच पर आने से पहले माहौल को गरमाने का काम ‘वाह वाह क्या बात है’ फेम कमलेश दवे और पंडित असीम शुक्ला की जोड़ी ने किया। दोनों ने मालवी और ठेठ देसी अंदाज में हास्य की ऐसी चाशनी घोली कि दर्शक शुरुआत से ही लोटपोट होने लगे। रोजमर्रा के दांपत्य जीवन, पड़ोसियों के ताने-बाने और आम आदमी की छोटी-छोटी ख्वाहिशों पर उनके व्यंग्य ने शाम को एक मजबूत आधार दिया।
कार्यक्रम का आगाज महापौर पारस सिंघवी, मेला संयोजक प्रमोद सामर, पूर्व जिलाध्यक्ष मांगीलाल जोशी, पूर्व मंत्री हरीश राजानी, वरिष्ठ नेता लाल सिंह झाला, पूर्व पुलिस अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद गोयल, एडीएम जितेन्द्र ओझा, एएसपी उमेश ओझा, डीएसपी जितेन्द्र आंचलिया, के. जी. मून्दड़ा, गिरीश शर्मा और कुलदीप नाहर सहित विभिन्न समाज प्रमुखों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ था।
आज शहर की अपनी प्रतिभाएं, कल कवियों के तरकश से निकलेंगे तीर
दीपावली मेला प्रेस समिति के अध्यक्ष प्रताप सिंह राठौड़ ने बताया कि सोमवार की शाम एक बार फिर शहर के अपने फनकारों के नाम होगी, जहाँ स्थानीय युवा और बच्चे अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। वहीं मेला अधिकारी हरि सिंह देवल के अनुसार, मंगलवार को लगने वाला अखिल भारतीय कवि सम्मेलन साहित्यिक आकर्षण का केंद्र रहेगा, जिसमें सुप्रसिद्ध कवि एवं अभिनेता शैलेश लोढ़ा के साथ देश के शीर्ष कवि अपनी ओज, हास्य और व्यंग्य की रचनाओं से श्रोताओं को रूबरू कराएंगे।
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